ज्योतिष में संवत के पहले से दसवें दिन तक एक विशेष प्रकार की औषधि ग्रहण करने का विधान बताया गया है। ऐसा करने से वर्ष भर कोई भी रोग नहीं होता। आयुर्वेद चरक संहिता के अनुसार नीम के कोमल पत्ते, निंबोली, सेंधा नमक, काली मिर्च, ईमली, हींग, अजवाइन, जीरा और तुलसी दल कूट पीसकर शक्कर में मिला लें। इसे पानी में मिलाकर शरबत के रूप में पीने से रक्त विकार, वात पित्त और कफ के तमाम रोग मिट जाते हैं। शास्त्रों के अनुसार संवत के पहले दिन से दसवें दिन तक सवेरे के समय यह औषधीय शरबत पीने से संपूर्ण आरोग्य की प्राप्त एक वर्ष के लिए हो जाती है।