फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

ये क्या करने को मजबूर हो गया राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार विजेता, PM मोदी ने किया था सम्मानित

Fri, 26 Jan 2018 10:25 AM IST
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, देहरादून
विज्ञापन
1 of 5
arjun
राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार से सम्मानित बहादुर बच्चों को पुरस्कार दिए जाने के बाद उनकी जिंदगी कैसी होती है यह इस बच्चे की कहानी बहुत अच्छे से बयां करती है।


 
विज्ञापन

2 of 5
National Bravery Award

जी हां, लोग यह मानते हैं कि उन बच्चों की जिंदगी संवर जाती है, लेकिन सच ये है कि सरकार उन्हें भुला देती है।  वर्ष 2015 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार प्राप्त करने वाला अर्जुन इन दिनों देहरादून में पढ़ाई पूरी करने के लिए पार्ट टाइम जॉब ढूंढ रहा है। अर्जुन के मुताबिक तत्कालीन प्रदेश सरकार ने 50 हजार रुपये की आर्थिक सहायता का आश्वासन दिया था, लेकिन आज तक सहायता नहीं मिली।  


 
विज्ञापन

3 of 5
National Bravery Awards
  गुलदार से मां की जान बचाने वाले टिहरी के मालगांव निवासी अर्जुन के मुताबिक राजकीय इंटरमीडिएट कालेज मधकुडीसैंण से विज्ञान वर्ग से इंटरमीडिएट की पढ़ाई पूरी करने के बाद वे देहरादून से स्नातक की पढ़ाई करना चाहता है।

 

4 of 5
National Bravery Award
पढ़ाई के लिए देहरादून आया हुआ है, लेकिन कालेज में दाखिला लेने के साथ ही वह पार्ट टाइम जॉब भी ढूंढ रहा है। वे कहता है कि कही कोई पार्ट टाइम जॉब है तो बताएं ताकि वह पार्ट टाइम जॉब कर अपनी पढ़ाई पूरी कर सके। अर्जुन चार भाई बहनों में सबसे छोड़ा है।

 
विज्ञापन
विज्ञापन

5 of 5
pm modi
उसकी मां टिहरी के स्कूल में भोजन माता है जिसे मुश्किल से डेढ़ हजार रुपये मानदेय मिलता है। जबकि उसके पिता सोहन सिंह की 14 साल पहले दिल का दौरा पड़ने से मौत हो चुकी है। वही 2016 में राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार प्राप्त देहरादून का रायपुर ब्लॉक निवासी सुमित ममगाई इंटर कालेज भगद्वारीखाल में दसवीं का छात्र है। वे बताता है कि जो आश्वासन मिला उस पर अमल नहीं हुआ।
 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें