देवभूमि के इस मंदिर में नागराज और उनकी अद्भुत मणि विराजमान है, लेकिन अगर मंदिर में आने वाले किसी भक्त ने यहां के नियम तोड़े तो वह अंधे भी हो सकते हैं।
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लाटू देवता
- फोटो : amarujala
इस मंदिर में पुजारी के अलावा और किसी महिला और पुरुष को प्रवेश करने की अनुमति नहीं है।
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latu
- फोटो : amarujala
इतना नहीं नहीं इस मंदिर में पुजारी को भी आंख, नाक और मुंह पर पट्टी बांध कर देवता की पूजा करनी पड़ती है। श्रद्धालु इस मंदिर परिसर से लगभग 75 फीट की दूरी पर रहकर पूजन करते हैं।
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लाटू देवता
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स्थानीय लोगों का मानना है कि इस मंदिर में नागराज अपनी अद्भुत मणि के साथ रहते हैं। जिसे देखना आम लोगों के वश की बात नहीं है। पुजारी भी नागराज के महान रूप को देखकर डर न जाएं इसलिए वे अपने आंख पर पट्टी बांधते हैं।
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लाटू मंदिर
यह भी मानना है कि मणि की तेज रौशनी इंसान को अंधा बना देती है। न तो पुजारी के मुंह की गंध तक देवता तक और न ही नागराज की विषैली गंध पुजारी के नाक तक पहुंचनी चाहिए। इसलिए वे नाक-मुंह पर पट्टी लगाते हैं।
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लाटू मंदिर
चमोली जिले में देवाल ब्लॉक में वांण नामक स्थान पर मौजूद यह देवस्थल लाटू मंदिर नाम से जाना जाता है। मान्यताओं के अनुसान लाटू देवता नंदा देवी के धर्म भाई हैं। वांण गांव 12 साल बाद होने वाली उत्तराखंड की सबसे लंबी पैदल यात्रा श्रीनंदा देवी की राज जात यात्रा का बारहवां पड़ाव है।
इस मंदिर के कपाट साल में एक ही दिन वैशाख माह की पूर्णिमा को खुलते हैं और पुजारी आंख-मुंह पर पट्टी बांधकर कपाट खोलते हैं। श्रद्धालु और भक्त दिन भर दूर से ही लाटू देवता का दर्शन कर मनोकामना मांगते हैं। इस दिन यहां एक विशाल मेला लगता है।