नाग पंचमी सात अगस्त को है। आज अमर उजाला आपको बता रहा है कि क्यों नाग पंचमी पर नाग देवता का पूजन करना जरूरी है और कैसे नाग देवती की पूजा की जाती है।
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naag panchami
माना जाता है कि इस दिन नागों की पूजा करने से सर्पों का भय दूर होता है और व्यक्ति के जीवन में खुशहाली आती है। इस मौके के लिए मंदिरों में विशेष तैयारियां की गई हैं।
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नाग पंचमी के दिन भोले बाबा और नाग देवता की विशेष पूजा-अर्चना की जाएगी। मंदिरों में नाग देवता का दूध, दही, शहद आदि से अभिषेक किया जाएगा।
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उत्तराखंड विद्वत सभा के पूर्व उपाध्यक्ष आचार्य भरत राम तिवारी के अनुसार नाग पंचमी पर व्रत करने से सर्पों का भय दूर होता है। नाग देवता की पूजा करने के साथ ही उन्हें मालपुआ चढ़ाना चाहिए।
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इस दिन सोना, चांदी, तांबा, पीतल आदि से निर्मित नागों का पूजन करें। नाग देवता का रुद्राभिषेक कर नौ नागों को नदी में प्रवाहित करें। इससे व्यक्ति के जीवन में खुशहाली आती है।
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आचार्य सुशांत राज के अनुसार नागों को जलाशय में प्रवाहित करने के बाद स्नान करें, इसके पश्चात वस्त्रों का त्याग करें। नवीन वस्त्र धारण करें। नाग स्तोत्र का पाठ करें। घर के मुख्य द्वार पर गोबर से सर्पाकृति बनाकर उसकी पूजा करें।
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इन नौ प्रकार के नागों की होती है पूजाः अनन्त, वासुकी, तक्षक कर्कोटक, महापद्म, नील, शंखपाल, कुलिक, कालिय।