उत्तराखंड यानि देवताओं की भूमि, और यहां के कण-कण में देवताओं का वास है। शक्तिपीठों और धामों की इस भूमि पर कई मंदिर ऐसे भी हैं जो सालों साल से अपने वजूद की कहानी बयां कर रहे हैं। तो चलिए हम आपको बताते हैं ऐसे ही मंदिर के बारे में जो एक व्यक्ति ने, एक दिन में, एक ही औजार से बनाया है।
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ये सुन कर भले ही आपको आश्चर्य हो रहा है, पर ये बात है एक दम सच है। इस मंदिर का नाम है 'एक हथिया देवाल'। इस मंदिर को देखकर आप कभी यकीन ही नहीं कर पाएंगे कि यह एक ही पत्थर से बना है। आइए आपको रूबरू कराते हैं इस अनोखे मंदिर से...
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उत्तराखंड के सीमान्त जिला पिथौरागढ़ से तकरीबन 70 किलोमीटर दूर स्थित है थल कस्बे की ग्राम सभा बल्तिर में यह मंदिर है। यह एक श्रापित मंदिर है। यह मंदिर शिव भगवान को समर्पित है लेकिन इस मंदिर में पूजा-पाठ करना वर्जित है।
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जनश्रुतियों के मुताबिक़ 12वीं शताब्दी में बने इस मंदिर के बारे में कहा जाता है कि यह मंदिर नागर और लैटिन शैली की स्थापत्य कला का अनोखा संयोजन है। लेकिन इसमें एक ऐसी खामी है कि आज तक यहां कोई पूजा नहीं कर पाता है।
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जी हाँ, मंदिर को देखने तो लोग दूर- दूर से पहुंचते हैं, परंतु पूजा-अर्चना निषेध होने के कारण केवल देख कर ही लौट जाते हैं। कहा जाता है कि इस गाँव में एक मूर्तिकार था। एक बार किसी दुर्घटना में उसका एक हाथ कट गया। वह बहुत निराश हुआ पर हारा नहीं मानी। लेकिन गांव वालों ने उसका मजाक बनाया। इसलिए उसने एक दिन रात को छेनी, हथौड़ा लेकर गाँव के दक्षिणी की ओर निकल पडा।
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उसने एक चट्टान देखी और वहां रातों रात मंदिर खड़ा कर दिया। लेकिन तब यह ध्यान नहीं किया कि वह स्थान लोगों के शौच आदि के लिए था। स्थानीय पंडितो ने उस मंदिर के अंदर उकेरी गयी भगवान शंकर के लिंग और मूर्ति को देखा तो कुछ खामिया पाई गईं।
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साथ ही मूर्तिकार ने जल्दबाजी में मंदिर के अंदर स्थापित शिवलिंग का अरघा विपरीत दिशा में बना दिया, जिसकी पूजा फलदायक नहीं होगी। ऐसी स्थिति को दोषपूर्ण माना जाता है और पूजा के बाद विपरीत परिणाम होता है। इसके बाद मंदिर में पूजा नहीं की गई।
एक अन्य कथा के अनुसार, यहां के राजा ने एक कारीगर के हाथ कटवा दिए ताकि वो कोई दूसरी सुंदर कारीगरी न कर सके। इससे आहत होकर उस कारीगर ने अपने एक ही हाथ से इस मंदिर का निर्माण किया और इलाके को छोड़कर चला गया।
(अमर उजाला इस इन तथ्यों की तस्दीक नहीं करता है। यह केवल मान्यताओं के आधार पर ही पेश किए गए हैं।)