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युवाओं के दिलों पर राज करने वाले MS धोनी के गांव में नहीं है एक भी युवा, पीछे है यह बड़ा कारण

Wed, 04 Apr 2018 08:55 AM IST
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, देहरादून
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अपनी जानदार कप्तानी से युवाओं के दिलों पर राज करने वाले एमएस धोनी के गांव में युवा रहना ही नहीं चाहते। जानिए...
 
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दरअसल, अल्मोड़ा स्थित धोनी का ल्वाली गांव पलायन का दंश झेल रहा है। ग्रामीणों के मुताबिक, वर्ष 2004 में महेंद्र सिंह धोनी आखिरी बार अपने गांव आए थे, तब गांव में बड़ी संख्या में लोग रहते थे। लेकिन उसके बाद से यहां युवाओं का पलायन शुरू हो गया।

 
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नतीजा यह हुआ कि मात्र 46 लोगों की आबादी वाले इस गांव में अब सिर्फ 13 पुरुष न 33 महिलाएं ही रहती है। स्थिति यह हो गई है कि यहां 45 वर्ष तक की उम्र का एक भी व्यक्ति नहीं रहता है। गांव में मूलभूत सुविधाओं के अभाव में लोग शहरों की तरफ पलायन कर रहे हैं।

 

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इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि, इस गांव में आज तक सड़क ही नहीं बनाई गई। गांव वालों के मुताबिक, साल 2012 में सड़क की मंजूरी मिली थी। सड़क मार्ग में काम भी हुआ। लेकिन इसके बाद फिर से यहां काम बंद हो गया। इसके कारण यहां से युवाओं ने पलायन करना शुरू कर दिया।

 
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किक्रेटर महेंद्र सिंह धोनी के पिता पान सिंह ने भी करीब 40 साल पहले अपने पैतृक गांव को छोड़ दिया। वह रोजगार के लिए रांची चले गए। बाद में वह वहीं रहने लगे। हालांकि अभी धोनी के पिता धार्मिक आयोजनों में गांव में आते हैं। धोनी के चाचा घनपत सिंह भी अब गांव में नहीं रहते हैं।
 
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महेंद्र सिंह धोनी - फोटो : self
गांव में रहने वाले दीवान सिंह सबसे बुजुर्ग (78) साल के हैं। वहीं सबसे कम उम्र के व्यक्ति हैं हयात सिंह जो कि 45 साल के हैं। वहीं कुछ 16 साल से कम के बच्चे हैं।  यहां अस्पताल, स्कूल आदि की सुविधाएं न होने के कारण लोग पढ़ाई व नौकरी के लिए बाहर ही जाकर रह रहे हैं।

 
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