मोहन भागवत
संघ के मूल एजेंडे से जुड़े मुद्दों के उन्होंने एक किनारे रखते हुए कोई राजनीतिक बात नहीं की। उनका पूरा जोर परिवारों के संस्कार, संस्कृति, भाषा, रहन-सहन और देश के प्रति दायित्वों का निर्वहन था। उन्होंने कहा कि ये प्रश्न उठना लाजिमी है कि संघ परिवारों को क्यों महत्व दे रहा है? ये पूरा समाज और देश एक परिवार है और हम नागरिक इसके सदस्य हैं।