देहरादून में मोहन भागवत
देहरादून पहुंचे भागवत ने कार्यक्रम में शामिल लोक कलाकारों और साहित्यकारों को एक कहानी सुनाई। इसका मूल मंत्र था कि बिना देखे बोला जाएगा तो वह गलत ही दिखेगा। संघ प्रमुख ने कहानी सुनाई। कहा-दो दोस्त थे, उनमें से एक नेत्रहीन था, जबकि दूसरा सामान्य। एक दिन सामान्य दोस्त ने कहा कि उसने खीर खाई है। नेत्रहीन ने पूछा खीर कैसी होती है।