गुलमर्ग की घाटियों में आठ जनवरी को लापता हुए सैनिक राजेंद्र सिंह का पार्थिव शरीर मिलने की सूचना के बाद पज्याणा गांव में मातम छा गया। गांव में रह रहे उनके माता-पिता, भाई व अन्य परिजन बेसुध हो गए। राजेंद्र सिंह के परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।
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- फोटो : अमर उजाला
माता-पिता को विश्वास नहीं हो रहा है कि अब उनका जांबाज बेटा इस दुनिया में नहीं है। उन्होंने अपने बेटे के पार्थिव शरीर को पज्याणा गांव लाकर पैतृक घाट पर अंतिम संस्कार करने की मांग की है। हवलदार राजेंद्र सिंह के पिता रतन सिंह ने बताया कि शनिवार को दिन में सेना की ओर से उनको उनके बेटे का पार्थिव शरीर मिलने की सूचना मिली।
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इसमें कहा गया था कि 18 अगस्त तक सेना राजेंद्र सिंह के पार्थिव शरीर को लेकर देहरादून पहुंच जाएगी। फिर रात 12 बजे सेना की तरफ से फोन आया कि पार्थिव शरीर अभी श्रीनगर अस्पताल में रखा है। 19 या 20 अगस्त तक देहरादून पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा और फिर अंतिम संस्कार 21 अगस्त को हरिद्वार में किया जाएगा।
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उन्होंने दुख व्यक्त किया कि पैतृक घाट के बजाय हरिद्वार में उनके बेटे का दाह संस्कार किया जा रहा है, जोकि ठीक नहीं है। रतन सिंह ने बताया कि गत सात माह उनके परिवार ने तिल-तिल कर जिए हैं।
सभी लोग राजेंद्र सिंह के सकुशल घर लौटने की उम्मीद लगाए थे, लेकिन उनकी बुजुर्ग आंखों ने जो सपना देखा, वह सच नहीं हो सका। अब बेटे की मौत की खबर ने उनको बुरी तरह हिलाकर रख दिया है।