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इस साल उत्तराखंड के छह लाल देश की रक्षा में शहीद, पढ़ें इनकी जाबांजी

Wed, 14 Jun 2017 08:24 AM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, देहरादून
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martyr
उत्तराखंड सिर्फ देवभूमि ही नहीं वीरों की भूमि भी है। पिछले छह महीने में यहां की मांओं ने अपने कई वीर बेटे देश की रक्षा में न्योछावर कर दिए। जानिए, इनकी जाबांजी की कहानी...
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jeet bahadur singh thapa - फोटो : amarujala
हम आपको बता रहे हैं उत्तराखंड की देवभूमि से ताल्लुक रखने वाले देश के वीर जवानों की। बता दें कि 12 जून को जम्मू एंड कश्मीर में आतंकियों से लड़ते हुए देहरादून का वीर सिपाही जीत बहादुर थापा लड़ते हुए शहीद हो गया।
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jeet bahadur thapa - फोटो : amar ujala
जीत बहादुर तीन माह बाद रिटायर आने वाले थे। लेकिन उससे पहले ही वह तिरंगे में लिपटे हुए घर पहुंचे। हालांकि उनके परिवार को अपने बेटे की बहादुरी पर गर्व है। लेकिन खो जाने का दुख भी।

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शहीद मनमोहन बुधानी
इससे पहले 18 अप्रैल 2017 को जम्मू कश्मीर के पुंछ सेक्टर में पाकिस्तान की ओर से की गई गोलीबारी में नैनीताल जनपद स्थित कोटाबाग ब्लॉक की ग्राम सभा आंवलाकोट निवासी सैनिक मनमोहन बुधानी शहीद हो गए थे। 
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शहीद हवलदार रवींद्र सिंह दिगारी
10 मार्च 2017 को पिथौरागढ़ जनपद के कनालीछीना तहसील के कंडाली ग्राम पंचायत के अंतर्गत रिठगढ़ निवासी हवलदार रवींद्र सिंह दिगारी (52) पुत्र बहादुर सिंह दिगारी नागालैंड में तैनात थे। उग्रवादियों से मुठभेड़ में उनकी मौत हो गई। 
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शहीद हीरा बल्लभ भट्ट
11 मार्च 2017 को छत्तीसगढ़ के सुकमा क्षेत्र में नैनीताल जनपद के सहायक सब इंस्पेक्टर हीरा बल्लभ भट्ट नक्सली हमले का शिकार हुए थे। इसमें 12 जवानों के साथ वे भी शहीद हो गए थे।  नक्सली हमले में शहीद हीरा बल्लभ भट्ट (43) गांव और मित्रों के बीच हरीश नाम से ही जाने जाते थे। जिस दिन घर से उनकी अर्थी उठी, उसी दिन उनके बेटे का जन्मदिन था। 
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शहीद धर्मेंद्र कुमार शाह
नैनीताल जनपद के कोटाबाग ब्लॉक के पतलिया निवासी शहीद धर्मेंद्र कुमार शाह बांदीपुरा में आतंकियों से मुठभेड़ में शहीद हुए। उनका पार्थिव शरीर 14 फरवरी को घर लाया गया था। धर्मेंद्र कुमार शाह (26) पुत्र मोहनलाल शाह 29 पैरा स्पेशल फोर्स में कमांडो थे। वह 31 आरआर में जम्मू-कश्मीर में तैनात थे।
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शहीद रघुवीर सिंह
कश्मीर घाटी के कुलगाम जिले में आतंकियों से लोहा लेते शहीद हुए राष्ट्रीय राइफल के जवान चमोली जनपद के मैखोली गांव के रघुवीर सिंह को 16 फरवरी को गांव आना था। 18 फरवरी को गांव में रघुवीर के परिवार की ओर से बनाए गए मंदिर में भगवान शिव की मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा होनी थी। लेकिन घर आने की तिथि से दो दिन पहले ही 12 फरवरी को रघुवीर का तिरंगे में लिपटा शव मैखोला पहुंचा।
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