71 आदमखोर बाघ और तेंदुओं को मार गिराने वाले ‘मिनी कार्बेट’ के नाम से प्रसिद्ध शिकारी ठाकुर दत्त जोशी का निधन हो गया। वह 82 वर्ष के थे। बुधवार शाम स्वास्थ्य में कुछ गिरावट आने पर परिजन उन्हें दिल्ली ले जा रहे थे, लेकिन रास्ते में रामनगर के पास पहुंचते ही उन्होंने दम तोड़ दिया। शुक्रवार को सीतावनी घाट पर उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा।
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thakur dutt
कोटाबाग के देवीरामपुर गांव निवासी स्व. जोशी के निधन की सूचना मिलते ही तमाम राजनीतिक, प्रशासनिक सेवा से जुड़े लोगों ने उनके घर पहुंचकर शोक संवेदना प्रकट की। यूपी सरकार के समय राज्यपाल मोतीलाल बोरा ने उन्हें ‘मिनी कार्बेट’ की उपाधि से नवाजा था। वे वन विभाग से सेवानिवृत्त थे।
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leopard
अपने सेवाकाल में उन्होंने जिम कार्बेट की भांति 71 नरभक्षी बाघ, तेंदुओं को मारकर लोगों को दहशत से राहत दिलाई थी। इस कारण सेवानिवृत्ति के बाद भी वन विभाग, कार्बेट टाइगर रिजर्व प्रशासन मानव वन्यजीव संघर्ष रोकने के लिए उनकी सेवा लेता रहता था। उन्होंने ‘कुमाऊं के खौफनाक आदमखोर’ नाम से पुस्तक भी लिखी थी। टेंपल टाइगर के नाम से इसका अंग्रेजी अनुवाद भी हुआ है।
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बायोडायवर्सिटी पार्क में तेंदुआ
- फोटो : अमर उजाला
निर्भीक, साहसी ठाकुर दत्त जोशी का सामना बचपन से ही आदमखोर जानवरों से रहा। सन 1936 को हल्द्वानी में जन्मे ठाकुर दत्त जोशी के सिर से बचपन में ही माता-पिता का साया उठ गया था। वर्ष 2010 में ‘कुमाऊं के खौफनाक आदमखोर’ नाम से उनकी किताब छपी। इस किताब के मुताबिक गर्मियों की छुट्टियों के समय ठाकुर अपने घर के जानवर को चराने के लिए जंगल जाते थे।
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त्यारी के पास बीच रोड में लेटा तेंदुआ
- फोटो : अमर उजाला
ठाकुर की बैलों की जोड़ी थी। इनके नाम ढिकुवा-गोविंदा थे। इन पर उनका विशेष ध्यान रहता था क्योंकि ये वही बैलों की जोड़ी थी, जिससे गांव में जुताई, मंडाई आदि खेती के काम कराने होते थे। ठाकुर को शायद इस बात का कभी अहसास नहीं हुआ कि जिन जानवरों को चराने के लिए वह जंगल में ले जा रहे हैं वह इतने प्रेरक बनेंगे। बेहद साहसी ठाकुर जब जानवर चराने के लिए जंगल जाते थे तो वह इस बात से बेफिक्र रहते थे कि जंगल में उनके साथ क्या होगा।
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जंगल में निहत्थे ठाकुर का पहली बार तेंदुए से सामना हुआ। इस घटना में उनके बैलों के जोडे़ पर अचानक तेंदुआ झपटा तो उन्होंने पत्थर मार कर तेंदुए से अपने बैल बचा लिए। इस घटना के बाद जोशी ने कई आदमखोरों के आतंक से स्थानीय जनता को निजात दिलाई। रिकॉर्ड के मुताबिक जोशी ने 71 आदमखोर बाघ, तेंदुओं को मारा था। वन विभाग में वन्यजंतु रक्षक के पद पर कार्यरत रहे जोशी ने जनता को आजीवन आदमखोर जानवरों से निजात दिलाई।
ठाकुर दत्त जोशी अपनी 315 बोर की रायफल हमेशा साथ रखते थे, वन विभाग में कार्यरत रहने, सेवानिवृत्ति के बाद उन्होंने कई आदमखोर बाघ, तेंदुओं के आतंक से ग्रामीणों को निजात दिलाई, जिनमें मोहान की मवेशी भक्षक बाघिन, कुकरैल (लखनऊ) का नरभक्षी बाघ, चौफुला का आदमखोर बाघ, मौलेखाल, रातीघाट, चंपावत, पिथौरागढ़, खांखरा (अलकनंदा) के आदमखोर से राहत दिलाई।