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मकर संक्रांति 2019: 14 या 15 जनवरी, कब मनाई जाएगी, यहां जानिए सही तारीख और शुभ मुहूर्त...

Thu, 10 Jan 2019 10:26 AM IST
अलका त्यागी विनोद चमोली/अमर उजाला, चंबा (टिहरी)
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ganga snan
भगवान सूर्य को समर्पित मकर संक्रांति के त्योहार की तारीख और मुहुर्त को लेकर कंफ्यूजन है तो यहां दूर कीजिए। यह त्योहार अमूमन 14 जनवरी को मनाया जाता है, लेकिन इस बार यह पर्व 15 जनवरी को मनाया जाएगा। दरअसल, 15 जनवरी को सूर्योदय काल में सूर्य देव मकर राशि में स्थित होंगे, जिससे शास्त्रानुसार उदयकालीन तिथि की मान्यता के अनुसार 15 जनवरी को सूर्योदय से दोपहर तक स्नान, दान किया जाना पुण्यकारी होगा। 
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astrology - फोटो : astrology
सनातन धर्म में जब भगवान सूर्यदेव एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश करते हैं, तो इसे संक्रमण या संक्रांति कहा जाता है। संक्रांति का नामकरण उस राशि से होता है, जिस राशि में सूर्यदेव प्रवेश करते हैं। मकर संक्रांति के दिन सूर्यदेव धनु राशि से अपने पुत्र शनि की राशि में प्रवेश करते हैं। दरअसल मकर संक्रांति पर्व का निर्धारण सूर्य की गति के अनुसार होता है। 
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makar sankranti
प्राय: हर साल 14 जनवरी को ही सूर्यदेव अपनी कक्षा परिवर्तित कर दक्षिणायन से उत्तरायण होकर मकर राशि में प्रवेश करते हैं, लेकिन इस साल पर्व 14 के बजाए 15 जनवरी को मनाया जाएगा। इस साल भगवान सूर्य 14 जनवरी को शाम 7.28 बजे मकर राशि में प्रवेश करेंगे। मगर तब तक सूर्यास्त हो चुका होगा। ऐसे में लोगों में मकर संक्रांति पर्व की तिथि को लेकर दुविधा है। 

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ganga snan - फोटो : file photo
मान्यता है कि सूर्य का मकर राशि में प्रवेश शाम या रात्रि को होगा, तो इस स्थिति में पुण्यकाल अगले दिन स्थानांतरित हो जाता है। शास्त्रों में उदय काल (सूर्योदय) को ही महत्व दिया गया है। ऐसे में उदयकालीन तिथि की मान्यता के अनुसार 15 जनवरी को ही सूर्योदय से लेकर दोपहर 11.28 बजे तक मकर संक्रांति पर्व का पुण्य काल रहेगा। इस दिन गंगा स्नान के लिए तीर्थ स्थल और संगम तटों पर श्रद्धालुओं का भारी सैलाब उमड़कर स्नान-दान का पुण्य लाभ अर्जित करता है। 
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ganga snan - फोटो : file photo
ज्योतिषाचार्य पंडित उदय शंकर भट्ट, वासुदेव प्रसाद सेमवाल का कहना है कि सूर्य के उत्तरायण होने से मनुष्य की कार्यक्षमता में वृद्धि होती है। उदयकालीन तिथि के अनुसार 15 जनवरी को ही सूर्योदय काल से दोपहर 11.28 बजे तक मकर संक्रांति के पुण्य काल में स्नान दान किया जाना लाभदायक है। 
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dana
इस दिन भगवान सूर्यदेव धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करते हैं। शास्त्रों में उत्तरायण की अवधि को देवताओं का दिन और दक्षिणायन को देवताओं की रात के तौर पर माना जाता है। इस दिन गंगा स्नान, दान, तप, जप, आदि का अत्यधिक महत्व है। शास्त्रों के अनुसार इस अवसर पर किया गया दान सौ गुना होकर प्राप्त होता है। इस दिन घी, कंबल, तिल, चावल के दान का विशेष महत्व है।  
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