महाशिवरात्रि पर भगवान भोले की आराधना सफल करनी है तो इन बातों का जरूर ध्यान रखें। अगर इन्हें नजरअंदाज किया तो अनिष्ट हो सकता है।
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lord shiva
पंडित विपिन चंद्र जोशी के अनुसार आधी रात से पूर्व और आधी रात के उपरांत अगर चतुर्दशी युक्त न हो, तो व्रत धारण नहीं करना चाहिए। ऐसे समय में व्रत करने से आयु और ऐश्वर्य की हानि होती है।
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भगवान शिव
- फोटो : AmarUjala
माधव मत से 'ईशान संहिता' में वर्णित है कि जिस तिथि में आधी रात को चतुर्दशी की प्राप्ति होती है, उसी तिथि में भगवान शिव की प्रसन्नता के लिए व्रत करें।
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कैथल में भगवान शिव का अनोखा रहस्यमयी मंदिर
व्रत प्रात: काल स्नान से निवृत्त होकर एक वेदी पर कलश की स्थापना कर गौरी-शंकर की मूर्ति या चित्र रखें। कलश को जल से भर कर रोली, मौली, अक्षत, पान सुपारी, लौंग, इलायची, चंदन, दूध, दही, घी, शहद, कमलगट्टा, धतूरा, बिल्व पत्र, कनेर आदि अर्पित करें और भगवान शिव की आरती करें।