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ज्योतिष शास्त्रों में स्पष्ट लिखा है कि सकाम कर्म में तिथि, बार, नक्षत्र का ध्यान अवश्य रखना चाहिए। जो श्रृद्धालु निष्काम भक्ति में विश्वास करते हैं, उनके लिए व्रत का महत्व है। प्रत्येक त्योहार व व्रत का आधार ज्योतिषीय घटना है। अनेक पर्व सूर्यास्त के बाद के पर्व है। जबकि कुछ पर्व केवल दिन के पर्व है। दीपावली की भांति शिवरात्रि का पूजन रात में किया जाए तो अधिक लाभ होगा।