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महाशिवरात्रि पर देखिए वो जगह, जहां भगवान शिव और पार्वती ने लिए थे सात फेरे, तस्वीरें...

Tue, 13 Feb 2018 04:44 PM IST
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, देहरादून
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शिव पार्वती विवाह
महाशिवरात्रि को हिंदू धर्म में लोग भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह की वर्षगांठ के रूप में मनाते हैं। तो चलिए हम आपको दिखाते हैं वो जगह जहां महादेव और माता पार्वती ने सात फेरे लिए थे। तस्वीरें...

 
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shiva - फोटो : Amar Ujala/Vinay Bahuguna
यह जगह है उत्तराखंड के रूद्रप्रयाग जिले के त्रियुगीनारायण में। कहते हैं कि यहीं पर भगवान शिव और माता पार्वती ने शादी की थी। शिव-पार्वती के विवाह की गवाह अखंड ज्योति आज भी निरंतर जल रही है।


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shiva - फोटो : Amar Ujala/Vinay Bahuguna
इस ज्योति के दर्शन करने के लिए यहां भक्तों की भीड़ लगी रहती है। माना जाता है कि, शिव-पार्वती जी ने इसी पवित्र अग्नि को साक्षी मानकर विवाह किया था।

 

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shiva - फोटो : Amar Ujala/Vinay Bahuguna
मान्यता है कि इसकी ज्योति की भस्म में सुख, सौभाग्य और सफलता प्रदान करने की शक्ति है। इसलिए लोग इसे अपने माथे पर लगाते हैं। इसे लगातार जलाए रखने के लिए श्रद्धालु शुद्ध घी के साथ हवन की सामग्री डालते रहते हैं। सर्दी हो या गर्मी अथवा तेज बरसात, यह ज्योति हमेशा जलती रहती है।

 
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shiva - फोटो : Amar Ujala/Vinay Bahuguna
पौराणिक कथाओं के अनुसार जब देवी पार्वती ने भगवान शिव को पति के रूप में प्राप्त करने के लिए घोर तप किया। उनके नाम पर यहां गौरी कुंड बना है जिसका जल बहुत पवित्र माना जाता है।

 
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shiva - फोटो : Amar Ujala/Vinay Bahuguna
विवाह से पहले सभी देवताओं ने यहां स्नान भी किया और इसलिए यहां तीन कुंड बने हैं जिन्हें रुद्र कुंड, विष्णु कुंड और ब्रह्मा कुंड कहते हैं। इन तीनों कुंड में जल सरस्वती कुंड से आता है। सरस्वती कुंड का निर्माण विष्णु की नासिका से हुआ था और इसलिए ऐसी मान्यता है कि इन कुंड में स्नान से संतानहीनता से मुक्ति मिल जाती है।

 
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shiva - फोटो : Amar Ujala/Vinay Bahuguna
यहां अखंड ज्योति की भस्म को श्रद्धालु अपने साथ ले जाते हैं। वेदों में उल्लेख है कि यह त्रियुगीनारायण मंदिर त्रेतायुग से स्थापित है। जबकि केदारनाथ व बदरीनाथ द्वापरयुग में स्थापित हुए। यह भी मान्यता है कि इस स्थान पर विष्णु भगवान ने वामन देवता का अवतार लिया था।
 
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