फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

यहां जमीन के नीचे है भगवान शिव का रहस्यमयी लोक, आज तक कोई नहीं जान पाया इसके राज

Mon, 04 Sep 2017 06:23 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, देहरादून
विज्ञापन
1 of 8
patal
आज हम आपको बता रहे है भगवान श‌िव के ऐसे रहस्यमी लोक के बारे में ज‌िसके राज आज तक राज ही हैं। यहा आने वाला कोई भी व्यक्त‌ि इसके राज आज तक नहीं जान पाया। चल‌िए जानते हैं अनकही बातें...
विज्ञापन

2 of 8
Patal bhuvaneshwar
उत्तराखंड के पिथौरागढ़ ज़िले के गंगोलीहाट कस्बे के पास पाताल भुवनेश्वर गुफा क‌िसी त‌िल्समी गुफा से कम नहीं है। बाहर से एक छोटा सा द‌िखने वाले दरवाजे के पीछे जो दुन‌िया है वह आपको हैरान की देगी। जमीन से तकरीबन 90 फीट नीचे भगवान श‌िव के इस रहस्यमयी लोक के बारे में कई कहान‌ियां हैं।
विज्ञापन

3 of 8
Patal bhuvaneshwar
कहा जाता है क‌ि सबसे पहले त्रेता युग में राजा रितुपर्ण ने इस गुफा को खोजा। इसके बाद द्वापर युग में पांडवों ने इस गुफा को खोजा और स्वर्ग की यात्रा से पहले यहाँ भगवान शिव के साथ चौपड़ खेली। वहीं अंत में कलियुग में 822  ईसवीं में जगद् गुरु आदि शंकराचार्य ने इस गुफा को खोजा था।

4 of 8
Patal bhuvaneshwar
पाताल भुवनेश्वर गुफा शेष नाग के शरीर की हड्डियों पर खड़ी है। वहीं यहां कुदरत के तराशे गए पत्‍थरों की आकृत‌ियां भी बनी है। जमीन से कुछ दूरी पर चट्टानों से हाथी के तराशे हुए पैर भी द‌िखते हैं।
विज्ञापन

5 of 8
patal bhubaneswar cave
कहते हैं क‌ि भगवान श‌िव ने गणेश जी का स‌िर काटने के बाद यहीं पर रखा था। ज‌िसे आज भी पूजा जाता है। वहीं भगवान श‌िव की लीला स्थली होने के कारण उनकी विशाल जटाएं इन पत्थरों पर नजर आती हैं। शिव जी की तपस्या के कमण्डल, खाल सब नजर आते हैं। 
विज्ञापन

6 of 8
पाताल भ्‍ाुवनेश्‍वर
कहा जाता है क‌ि यहां बनी कालभैरव की जीभ से अगर आगे जाकर कोई पूंछ से भी आगे निकल जायें तो उसे मोक्ष प्राप्त हो जाता है।  यहां हंस की टेड़ी गर्दन वाली मूर्ति भी है। ब्रह्मा के इस हंस को शिव ने घायल कर दिया था क्योंकि उसने वहां रखा अमृत कुंड जुठा कर दिया था।
विज्ञापन

7 of 8
पाताल भ्‍ाुवनेश्‍वर गुफा
ब्रह्मा, विष्णु व महेश की मूर्तियां साथ-साथ स्थापित हैं। पर्यटक आश्चर्य चकित होता है जब छत के उपर एक ही छेद से क्रमवार पहले ब्रह्मा फिर विष्णु फिर महेश की इन मूर्तियों पर पानी टपकता रहता है, और फिर यही क्रम दोबारा से शुरू हो जाता है।
विज्ञापन

8 of 8
पाताल भ्‍ाुवनेश्‍वर कुंड
वहीं चौंकाने वाली बात यह है क‌‌ि यहां पर चारों युगों के प्रतीक पिंड यहां पर स्थित हैं, जबकि कलियुग का पिंड लम्बाई में अधिक है और उसके ठीक ऊपर गुफ़ा से लटका एक पिंड नीचे की ओर लटक रहा है और इनके मध्य की दूरी पुजारी के कथानुसार 7 करोड़ वर्षों में 1 इंच बढ़ती है और पुजारी का कथन सत्य मानें तो दोनों पिंडो के मिल जाने पर कलियुग समाप्त हो जायेगा। 
(अमर उजाला इन तथ्यों की पुष्ट‌ि नहीं करता है यह केवल मान्यताओं के आधार पर पेश क‌िए गए हैं।)
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें