अब तक जिस गुलदार से लोग खौफ खाते थे, अब उनसे डर नहीं लगेगा बल्कि पक्की दोस्ती होगी। इतना ही नहीं गुलदार आपकी हर मुसीबत में मदद भी करेंगे।
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डॉ. नासिर के साथ तेंदुए का बच्चा
वन विभाग ने लिविंग विद लैपर्ड प्रोजेक्ट पर कार्य शुरू भी कर दिया है। लैपर्ड के लिहाज से बेहद संवेदनशील 46 गांवों के ग्रामीणों को इसका प्रशिक्षण दिया जाएगा। गुलदार-मानव हमलों की बढ़ती घटनाओं को देखते हुए इस योजना की शुरुआत हुई है।
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तेंदुए का बच्चा
संजय गांधी नेशनल पार्क महाराष्ट्र में चल रहे प्रोजेक्ट की सफलता के बाद विभाग ने गढ़वाल में योजना शुरू किया है। प्रोजेक्ट में गांव के लोगों को लिविंग विद लैपर्ड के हर गुर सिखाए जाएंगे। जिले में लैपर्ड के लिहाज से पश्चिमी अमेली रेंज, दमदेवल व पौड़ी नागदेव वन क्षेत्र को बेहद संवेदनशील माना गया है।
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Leopard near runway shuts down Nepal international airport
इस रेंज के 46 ऐसे गांव चयनित किए गए, जहां लैपर्ड ने मानव जीवन को ज्यादा क्षति पहुंचाई है। अमेली रेंज में बरसू, बिजोली, मनकोट, मलेथा, खंदोड़ा, सकिंडा, रैंसोली, पंचुर, पुसोली, मुंडयाफ व छाम बड़ा।
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देहरादून
- फोटो : SELF
पोखड़ा-एकेश्वर रेंज में पोखड़ा, मेल गांव, भैड़गांव, कुणेथ, देवराड़ी, सिलेथ, भदमोली, वीणा मल्ली व तल्ली व पौड़ी नागदेव रेंज में रखुंड, ढंढकुर, तोणख्या, सिराला, बकरोड़ा, क्वीराली, पवाई, थामणा, कोरसाड़ा, कांडा, सासौ, मासौ, थापली, टंगरोली, डांग, फल्दा, दिवई, फरासू, भटोली, डुंगरी, कोटी व कमेड़ा का चयन किया गया है।
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फाइल फोटो
वन विभाग ने इन रेंज में रेपिड रिस्पांस टीम भी गठित कर दी है, जो लैपर्ड की सूचना मिलते ही तत्काल क्षेत्र में पहुंचेगी। गढ़वाल वन प्रभाग डीएफओ रमेश चंद्र का कहना है कि प्रोजेक्ट पर कार्य शुरू हो गया है।
ग्रामीणों में गुलदार का भय समाप्त कर लैपर्ड के साथ जीना सिखाना प्रोजेक्ट का मकसद है। प्रथम चरण में वन क्षेत्राधिकारियों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। वन अधिकारी ग्रामीणों को प्रशिक्षण देंगे।