ढाई वर्षीय हर्षित अपने माता-पिता का इकलौता बेटा था। करीब 15 दिन पहले हर्षित की छोटी बहन का नामकरण हुआ था। पिता बंगलूरू में नौकरी करते थे। मार्च में पत्नी के गर्भवती होने पर वह अपने बच्चों के साथ गांव आ गए थे। इधर, बेटी के जन्म के बीच लॉकडाउन के कारण परिवार समेत वह गांव में ही रह रहे थे। सोमवार को घटना के बाद परिवार में मातम छा गया। मृतक की माता हेमा का रो-रोकर बुरा हाल रहा।