मृतका मीनाक्षी पर ही पूरे घर की जिम्मेदारी थी। वह गाय का दूध बेचकर किसी तरह परिवार का गुजर बसर करती थी। वह रोज सुबह लगभग 6 बजे भक्तियाना से करीब 4 किलोमीटर दूर जंगल में घास लेने जाती थी। उसके देवर गिरीश नौटियाल ने बताया कि भाई हरीश बेेरोजगार है, जबकि भतीजी बीएससी और भतीजा पॉलीटेक्निक कर रहा है। स्थानीय निवासी योगेंद्र बडोनी, प्रदीप नेगी, महेंद्र असवाल, जयपदी, मनीष खंडूड़ी, शिव कुमार और सतीश महाजन आदि ने डीएफओ को ज्ञापन भेजकर मृतका के आश्रितों को उचित मुआवजा और रोजगार देने की मांग की।