टीम लीडर कर्ण सिंह के अनुसार लगभग दो घंटे बाद मौसम में कुछ सुधार होने तक टेंट खड़ा किया और अगले दिन की योजना बनाने में जुट गए। इस दौरान स्वयं ही रात्रि का भोजन भी तैयार किया और नौ बजे तक सो गए। हेड कांस्टेबल भगत सिंह व कांस्टेबल मनोज जोशी, पंकज राणा ने बताया कि 18 सितंबर की सुबह छह बजे ही वह अपने मिशन पर आगे की तरफ बढ़ने लगे। जैसे-जैसे आगे बढ़ते गए, रास्ता दुर्गम होता रहा। बताया कि रास्ते के दोनों तरफ खाई से होकर घने जंगल, चट्टानें और गहरी गुफाओं से होते हुए वह गौरी माई खरक पहुंचे, जहां पर पत्थरों के समीप कुछ दूरी पर दो नर कंकाल मिले।