केदारनाथ मंदिर आइस एज के वक्त से अस्तित्व में है। ये हम नहीं कह रहे हैं, बल्कि वैज्ञानिकों का ऐसा मानना है।
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kedarnath
वैज्ञानिकों की मानें तो केदारनाथ का मंदिर 400 साल तक बर्फ में दबा रहा था, लेकिन फिर भी वह सुरक्षित बचा रहा।
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kedarnath
13वीं से 17वीं शताब्दी तक एक छोटा हिमयुग (आइए एज) आया था जिसमें यह मंदिर 400 साल तक बर्फ में दबा रहा फिर भी इस मंदिर को कुछ नहीं हुआ, इसलिए वैज्ञानिक इस बात से हैरान नहीं है कि जून 2013 में आई आपदा में यह मंदिर कैसे बच गया।
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केदारनाथ
देहरादून के वाडिया इंस्टीट्यूट के वैज्ञानिकों के मुताबिक 400 साल तक केदारनाथ के मंदिर के बर्फ के अंदर दबे रहने के बावजूद यह मंदिर सुरक्षित रहा। लेकिन जब बर्फ पीछे हटी तो उसके हटने के निशान मंदिर में छूट गए जो आ भी मौजूद हैं।
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kedarnath
वैज्ञानिकों ने इनकी स्टडी के आधार पर ही यह निष्कर्ष निकाला है। वैज्ञानिकों के मुताबिक 13वीं से 17वीं शताब्दी तक एक छोटा हिमयुग आया था जिसमें हिमालय का एक बड़ा क्षेत्र बर्फ के अंदर दब गया था।
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most horrible photos of kedarnath disaster
वैज्ञानिकों के अनुसार मंदिर की दीवार और पत्थरों पर आज भी इसके निशान हैं। ये निशान ग्लेशियर की रगड़ से बने हैं। ग्लैशियर हर वक्त खिसकते रहते हैं। वे न सिर्फ खिसकते हैं बल्कि उनके साथ उनका वजन भी होता, जिसके कारण उनके मार्ग में आई हर वस्तुएं रगड़ खाती हुई चलती हैं।
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most horrible photos of kedarnath disaster
400 साल तक मंदिर बर्फ में दबा रहा होगा तो मंदिर ने इन ग्लेशियर की रगड़ भी झेली होगी। लेकिन इस मंदिर को कुछ नहीं हुआ।
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special photo gallery on kedarnath disaster
विक्रम संवत् 1076 से 1099 तक राज करने वाले मालवा के राजा भोज ने इस मंदिर को बनवाया था, लेकिन कुछ लोगों के अनुसार यह मंदिर 8वीं शताब्दी में आदिशंकराचार्य ने बनवाया था।
गढ़वाल विकास निगम के अनुसार मौजूदा मंदिर 8वीं शताब्दी में आदिशंकराचार्य ने बनवाया था। यानी छोटा हिमयुग का दौर जो 13वीं शताब्दी में शुरू हुआ था उसके पहले ही यह मंदिर बन चुका था।