टीम में डा. विमिलेश जोशी, पशु चिकित्सक डा. शैलेंद्र वशिष्ठ, डा. प्रदीप उनियाल भी थे। वह बड़ी मुश्किल से 16 शव निकाल पाए थे। उनका डीएनए सैंपल लिया गया। बताया कि घाटी में पुराने रास्ते खत्म हो गए थे। केदारघाटी में बचे खच्चर, गाय, भैंस और कुत्तों का मिजाज बदल गया था।