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कोणार्क के सूर्य मंदिर से भी दो सौ साल पुराना है ये मंदिर, जानिए...

Wed, 28 Jun 2017 08:39 AM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, देहरादून
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katarmal sun temple
जानिए, सूर्य देव के ऐसे मंदिर बारे में, जिसके बारे में दावा किया जाता है कि यह उड़िसा  के कोणार्क के सूर्य मं‌दिर से भी बहुत पुराना है। जानिए, इस मंदिर के बारे में...
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कटारमल सूर्य मन्दिर उत्तराखण्ड में अल्मोड़ा के 'कटारमल' नामक स्थान पर स्थित है। इस कारण इसे 'कटारमल सूर्य मंदिर' कहा जाता है। यह सूर्य मन्दिर न सिर्फ़ समूचे कुमाऊँ मंडल का सबसे विशाल, ऊँचा और अनूठा मन्दिर है, बल्कि उड़ीसा के 'कोणार्क सूर्य मन्दिर' के बाद एकमात्र प्राचीन सूर्य मन्दिर भी है। 
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सूर्य देव प्रधान देवताओं की श्रेणी में आते हैं। वे समस्त सृष्टि के आधार स्वरूप हैं। संपूर्ण भारत में भगवान सूर्य देव की पूजा, अराधना बहुत श्रद्धा एवं भक्ति के साथ की जाती है।

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इस सूर्य मंदिर का इतिहास बहुत पुराना है। यह मंदिर कोणार्क के विश्वविख्यात सूर्य मंदिर से लगभग दो सौ वर्ष पुराना माना गया है। मंदिर नौवीं या ग्यारहवीं शताब्दी में निर्मित हुआ माना जाता है। इस मंदिर की स्थापना के विषय में विद्वानों में कई मतभेद हैं।
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कुछ इतिहासकारों का मानना है कि इस मंदिर का जीर्णोद्धार समय-समय पर होता रहा है। यह सूर्य मंदिर सूर्य देवता को समर्पित है। कहा जाता है कि इस मंदिर का निर्माण कटरामल के एक राजा ने करवाया था। प्रारंभिक मध्ययुगीन काल में कुमाऊँ में कत्यूरी राजवंश का शासन था, जिन्होंने इस मंदिर के निर्माण में योगदान दिया था।
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इस सूर्य मन्दिर को "बड़ आदित्य सूर्य मन्दिर" भी कहा जाता है। इस मन्दिर में भगवान आदित्य की मूर्ति किसी पत्थर अथवा धातु की नहीं अपितु बड़ के पेड़ की लकड़ी से बनी है। मन्दिर के गर्भगृह का प्रवेश द्वार भी उत्कीर्ण की हुई लकड़ी का ही था, जो इस समय दिल्ली के 'राष्ट्रीय संग्रहालय' की दीर्घा में रखा हुआ है।
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पूर्व दिशा की ओर मुख वाले इस मन्दिर के बारे में माना जाता है कि के इसे मध्य काल में कत्यूरी वंशज राजा कटारमल ने बनवाया था, जो उस समय मध्य हिमालय में शासन करते थे। मुख्य मन्दिर की संरचना त्रिरथ है, जो वर्गाकार गर्भगृह के साथ नागर शैली के वक्र रेखी शिखर सहित निर्मित है। मन्दिर में पहुंचते ही इसकी विशालता और वास्तु शिल्प बरबस ही पर्यटकों का मन मोह लेते हैं। 
(अमर उजाला इन तथ्यों की तस्दीक नहीं करता है। यह केवल मान्यताओं के आधार पर ही पेश क‌िए गए हैं।)
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