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महाभारत काल से चली आ रही दुर्योधन-कर्ण की दोस्ती आज भी यहां है जिंदा

Thu, 25 Aug 2016 12:54 PM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, देहरादून
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duryodhana temple in uttarkashi
महाभारत काल से चली आ रही दुर्योधन और कर्ण की दोस्ती देवभूमि उत्तराखंड की पावन भूमि पर आज भी जिंदा है। तस्वीरों में देखिए...
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duryodhana temple in uttarkashi
उत्तरकाशी के टोंस घाटी में दुर्योधन और कर्ण के मंदिर आस पास हैं। यहां नेटवर गांव में देश का इकलौता कर्ण का मंदिर मौजूद है। वहीं इससे थोड़ी दूर स्थित जखोली गांव में दुर्योधन का मंदिर है।
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duryodhana temple in uttarkashi
यहां दुर्योधन को देवता की तरह पूजा जाता है और दूर-दूर से लोग यहां आते हैं। आश्चर्य की बात है कि यहां उसके सबसे प्रिय मित्र कर्ण का भी एक मंदिर है। दुर्योधन का मंदिर कर्ण के मंदिर से करीब 12 किमी की दूरी पर हर की दून रोड पर स्थित एक गांव में है। उस गांव का नाम सौर है।

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duryodhana temple in uttarkashi
इस स्थान का संबंध महाभारत काल के एक योद्धा भब्रूवाहन से भी जोड़ा जाता है। कहा जाता है कि वह महाभारत युद्ध में भाग लेना चाहता था, लेकिन कृष्ण ने उसे युद्ध से वंचित कर दिया।
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duryodhana temple in uttarkashi
निस्संदेह दुर्योधन महाकाव्य महाभारत का एक सबसे अहम पात्र है, लेकिन इसकी पूजा होती हो या इसका कहीं मंदिर भी होगा यह जानने वाले लोगों को अजीब लगता है।
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duryodhana temple in uttarkashi
दुर्योधन के इस मंदिर से अनेक रोचक कथा-कहानियां जुड़ी हैं।
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duryodhana temple in uttarkashi
गांव के निवासियों को अपने गांव में दुर्योधन का मंदिर होने से कोई ख़ुशी या गर्व नहीं, बल्कि अफसोस होता है।
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शायद यही कारण है कि कुछ वर्षों पहले ही इस मंदिर को शिव मंदिर में बदल दिया गया और सोमेश्वर मंदिर नाम दे  दिया गया।
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