उत्तराखंड के श्रीनगर स्थित कमलेश्वर मंदिर में होने वाली पूजा निसंतान दंपतियों की सूनी गोद भरने के लिए प्रसिद्ध है। वैकुण्ठ चतुर्दशी के दिन इस मंदिर में निसंतान दंपति खड़े दीये की पूजा करते हैं। इस पूजा को करने के लिए रजिस्ट्रेशन शुरू हो चुका है।
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kamleshwar temple
- फोटो : AmarUjala
वैकुण्ठ चतुर्दशी के दिन गोधूलि बेला पर मंहत दीपक प्रज्वलित कर अनुष्ठान का आरंभ करते हैं। मंदिर के ब्राहमणों द्वारा प्रत्येक निसंतान दंपितयों का संकल्प और पूजा कराई जाती है। दूसरे दिन प्रात: शुभ मुर्हत पर भगवान कमलेश्वर का अभिषेक किया जाता है।
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- फोटो : file photo
प्रत्येक दंपति अपना दीपक शिव के प्रतिनिधित्व करने वाले मंहत को साक्षी मान शिवार्पण करते हैं। बाद में श्रीफल देकर निसंतान दंपतियों को भोजन कराया जाता है।
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कमलेश्वर मंदिर के महंत आशुतोष पुरी बताते हैं कि कमलेश्वर मंदिर में भगवान विष्णु ने देवासुर संग्राम के दौरान कार्तिक शुक्ला चतुर्दशी के दिन अस्त्र-शस्त्रों के लिए भगवान शंकर की तपस्या की थी।
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तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शंकर ने दूसरे दिन सुबह विष्णु को सुदर्शन चक्र प्रदान किया था। इस पूजा को पूजा एक निसंतान दंपति भी देख रहे थे। निसंतान दंपति ने भगवार शंकर से संतान का वरदान मांगा।
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माता पार्वती के आग्रह पर भगवान शिव ने उन्हें यह वरदान दिया कि जो भी कार्तिक शुक्ला चतुर्दशी के अवसर पर पूरी रात खड़ा दिया अनुष्ठान करेगा उसे संतान की प्राप्ति होगी।
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उसके बाद से ही यह अनुष्ठान चल रहा है। कहते हैं कि जामवंती के कहने पर श्रीकृष्ण ने भी यहां परखड़े दीपक का व्रत किया था। आगे जानिए कैसे करें पूजा का पंजीकरण...
कैसे करें पंजीकरण
अनुष्ठान में शामिल होने के लिए निसंतान दंपति फोन से या स्वयं आकर पंजीकरण करा सकते हैं। पंजीकरण निशुल्क किया जाता है। पूजा से ठीक पहले तक पंजीकरण किया जाता है। पंजीकरण के लिए इस नंबर पर 9412324526 संपर्क किया जा सकता है।