ब्रह़मांड में देवताओं के गुरु कहे जाने वाले गुरु बृहस्पति ने 12 साल बाद अपना स्थान परिवर्तन किया है। शुक्र दैत्यों के गुरु हैं। इस लिहाज से बृहस्पति अपने शत्रुओं की राशि में आ गए हैं। जानिए राशियों पर कैसा रहेगा इसका असर...
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- फोटो : amarujala
ज्योतिषशास्त्र के अनुसार बृहस्पति सबसे मजबूत और विशाल गृह है। यह बुधवार को कन्या राशि से निकलकर तुला राशि में आए हैं। ज्योतिषाचार्य डा. प्रतीक मिश्रपुरी के अनुसार तुला राशि का स्वामी शुक्र है जो कि बृहस्पति ग्रह का शत्रु है।
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गुरु के सूर्य चंद्रमा व मंगल मित्र हैं। जबकि बुध-शुक्र शत्रु व शनि सम हैं। गुरु कर्क राशि पर उच्च व मकर राशि पर नीच प्रभाव डालता है। 27 सितम्बर 2005 को भी इसी तरह बृहस्पति ने तुला राशि पर प्रवेश किया था। उसके बाद 12 साल बाद बुधवार को इस संयोग की पुनरावृत्ति हुई। इस राशि पर गुरु 11 अक्तूबर 2018 तक रहेंगे।
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मेष्ा
मेष- शिक्षा में सफलता, साझेदारी में लाभ, पदोन्नति, विवाह का योग
वृष- शत्रु भय, उदर रोग, मानसिक तनाव
मिथुन-लाभ, उन्नति होगी
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कर्क राशिः
कर्क- संसाधनों में वृद्धि, भूमि भवन का लाभ
सिंह- आकस्मिक धन का व्यय, शारिरिक कष्ट
कन्या-नवीन कार्य योजना बनेगी, संतान का सुख, धार्मिक कार्य में रुचि
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तुला
तुला- बंधु वर्ग से विरोध, खर्च बढ़ेगा, ज्ञान की वृद्धि
वृश्चिक-खर्चा बढ़ेगा, खानपान में सावधानी, भूमि लाभ, मान सम्मान में वृद्धि