जोशीमठ में मिट्टी के घर
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यहां सभी मकानों में दरारें आ गई हैं। आपदा प्रभावित यमुना प्रसाद कपरवाण का कहना है कि उनके पठाल और मिट्टी से बने मकान को करीब अस्सी साल हो गए हैं। यह मकान कई बार के भूकंप के झटके झेल चुका है तब हमारी मकान पर एक दरार तक नहीं पहुंची।