नगर का पुनर्वास सरकार के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। सरकार जहां अभी तक पुनर्वास, विस्थापन को लेकर कागजी लेखाजोखा तैयार नहीं कर पाई है। प्रभावित एकमत नहीं हैं। कुछ लोग जहां वन टाइम सेटलमेंट की बात कह रहे हैं तो कई लोग अपनी जड़ों को छोड़ना नहीं चाहते हैं।
भूधंसाव से प्रभावित क्षेत्र के 269 परिवारों को अलग-अलग स्थानों पर बनाए गए राहत शिविरों में शिफ्ट किया गया है। ये प्रभावित अपने भविष्य को लेकर भी चिंतित हैं। प्रभावित विनीता सुंदरियाल, रेखा जोशी, रंजना नेगी, अंजू खंडूड़ी, सुषमा सती, सरिता सती, सरिता चमोली, रेखा नंबूरी, ज्योति नौटियाल आदि का कहना है कि, सरकार मकान, खेत का आकलन कर बदरीनाथ की तर्ज पर मुआवजा दें जिससे वे अपना वन टाइम सेटलमेंट कर सके।
वहीं, देवेश्वरी शाह, मालती देवी, एमएल शाह का कहना है कि वह आखिरी सांस तक जोशीमठ नहीं छोड़ेंगे। इस मिट्टी में जन्में, पले-बढ़े, ऐसे में अन्यत्र विस्थापन का सवाल ही नहीं बनता। सरकार, जोशीमठ का स्थायी ट्रीटमेंट करते हुए मास्टर प्लान के तहत प्रभावितों के आवास बनाकर दे। साथ ही भूधंसाव से जो क्षति हुई है उसका मुुआवजा भी उन्हें मिले। प्रभावित, पुनर्वास के लिए चिह्नित किए जा रहे भू स्थलों को लेकर भी एकमत नहीं है।