फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Joshimath Sinking: आपदा का एक माह...वीरान हुए घर, राहत शिविरों में कट रही जिंदगी, पढ़ें कैसे बदले हालात

Thu, 02 Feb 2023 07:30 PM IST
अलका त्यागी अमर उजाला ब्यूरो, जोशीमठ
विज्ञापन
1 of 6
जोशीमठ में शिफ्ट किए गए प्रभावित - फोटो : अमर उजाला
जोशीमठ नगर में आई आपदा को एक माह हो गया है लेकिन अभी तक सरकार की तरफ से पुनर्वास को लेकर कोई समाधान नहीं निकल पाया है। एक माह से आपदा प्रभावित परिवार शिविरों में रह रहे हैं।

नगर में भू-धंसाव और मकानों में दरारें आने का सिलसिला काफी पहले शुरू हो गया था लेकिन दो जनवरी की रात को मनोहर बाग, सिंहधार और सुनील वार्ड के कई मकानों में अचानक बड़ी-बड़ी दरारें आ गई थीं। कुछ लोगों ने रात में ही घर छोड़ दिए थे। दो जनवरी की रात को ही मारवाड़ी वार्ड के जेपी कॉलोनी में पानी का रिसाव शुरू हुआ और यहां भी कई आवासीय भवनों की जमीन फट गई और दीवारें चटक गईं जिससे कई भवन रहने लायक नहीं रहे।

प्रशासन ने अगले दिन यहां के कई परिवारों को राहत शिविरों में भेजना शुरू कर दिया था। वर्तमान में 249 परिवारों के 904 सदस्य राहत शिविरों में रह रहे हैं जबकि 47 परिवारों के 91 सदस्य रिश्तेदार या किराये के भवन में चले गए हैं।

Joshimath: एक हफ्ते से भू-धंसाव क्षेत्र में पड़ी दरारों में नहीं हुआ कोई इजाफा, जानें कैसा है अब जोशीमठ का हाल

आपदा के एक माह बाद भी प्रभावित परिवारों के लोग अभी राहत शिविरों में रह रहे हैं लेकिन सरकार की ओर से अभी यह तय नहीं हो पाया है कि प्रभावितों का पुनर्वास किस तरह से किया जा सकेगा। हालांकि सरकार ने पुनर्वास को लेकर तीन विकल्प जरूर दिए हैं लेकिन प्रभावित किसी एक विकल्प को चुनने में असमंजस की स्थिति में हैं। वहीं प्रशासन की ओर से उद्यान विभाग की जमीन पर प्री फेब्रिकेटेड भवन के मॉडल बनाने का काम अंतिम चरण में है।
विज्ञापन

2 of 6
जोशीमठ में निरीक्षण करती टीम - फोटो : अमर उजाला
रिपोर्ट आने का इंतजार
भू-धंसाव तेज होने पर नगर में विभिन्न संस्थाओं के वैज्ञानिकों की टीमें जोशीमठ में जांच के लिए पहुंचीं थीं लेकिन अभी किसी भी संस्था की रिपोर्ट नहीं आई है। आपदा प्रभावितों के साथ ही नगर के सभी लोगों की निगाहें वैज्ञानिकों की रिपोर्ट पर लगी हुई हैं।
विज्ञापन

3 of 6
जोशीमठ में होटलों के ध्वस्तीकरण का काम जारी - फोटो : अमर उजाला
होटलों का ध्वस्तीकरण जारी
नगर के दो होटल माउंट व्यू और मलारी इन भू-धंसाव के कारण दिसंबर महीने में ही तिरछे हो गए थे जिससे इनकी छतें आपस में मिल गई थीं। प्रशासन ने 12 जनवरी से होटलों के ध्वस्तीकरण का काम शुरू किया था और दोनों होटलों को तोड़ने का काम अभी भी जारी है। इसके साथ ही एक माह में दो आवासीय भवन और लोक निर्माण विभाग का गेस्ट हाउस ध्वस्त किया गया है। वहीं, जेपी कॉलोनी में भी 15 आवासीय भवनों को तोड़ा जा रहा है।

4 of 6
जोशीमठ - फोटो : अमर उजाला
धरने पर डटे हैं आपदा प्रभावित
जोशीमठ बचाओ संघर्ष समिति का धरना बृहस्पतिवार को 33वें दिन भी जारी रहा। तहसील परिसर में समिति के बैनर तले धरने पर बैठे आपदा प्रभावितों की मांग है कि जल्द से जल्द पुनर्वास कर मुआवजा दिया जाए। साथ ही एनटीपीसी की परियोजना और हेलंग मारवाड़ी बाईपास के निर्माण को बंद किया जाए। धरने पर बैठने वालों में समिति के संयोजक अतुल सती, रेखा नंबूरी, मीना बहुगुणा, सरिता देवी, अनीता देवी, विनीता देवी, सुनीता देवी आदि शामिल रहे।
विज्ञापन

5 of 6
जोशीमठ में भू धंसाव देखती टीम - फोटो : अमर उजाला
सीबीआरआई की टीम लौटी
नगर में भू धंसाव के कारणों और उसकी वास्तविक स्थिति की जांच के लिए पहुंची सीबीआरआई रुड़की की टीम भी नगर से लौट चुकी है। बुधवार को टीम के सभी सदस्य चले गए। टीम ने यहां पूरे नगर का गहनता से निरीक्षण किया है। भवनों की स्थिति को देखकर लाल, पीले निशान और ध्वस्तीकरण के स्टीकर लगाए। वैज्ञानिकों ने बताया कि यहां से मिली रिपोर्ट को वह जल्द शासन को सौंप देंगे।
विज्ञापन
विज्ञापन

6 of 6
जोशीमठ में घरों को छोड़ते हुए भावुक हुए लोग - फोटो : अमर उजाला
क्या कहते हैं आपदा प्रभावित

एक महीना बीत गया, सरकार पुनर्वास पर कोई ठोस निर्णय नहीं ले पाई है। अब शिविरों में रहने वाले प्रभावितों के सब्र का बांध टूट रहा है। आखिर कब तक इस तरह से जिंदगी गुजारते रहेंगे।
- गीता परमार, मनोहर बाग वार्ड

सरकार के विस्थापन को लेकर निर्णय लेने में देरी से सभी चिंतित हैं। प्रभावितों में असमंजस की स्थिति है कि आखिर कब, कहां और किस तरह से उनका पुनर्वास होगा। सरकार को जल्द से जल्द निर्णय लेना चाहिए।
-अनीता देवी, सिंहधार वार्ड

हमने अपने पुश्तैनी मकान तोड़ने की अनुमति दे दी लेकिन उसका मुआवजा किस तरह और कितना मिलेगा इसको लेकर अभी तक कुछ स्पष्ट नहीं है। शिविरों में कब तक शरणार्थियों की तरह जीवन व्यतीत करते रहेंगे।
- सूरज कपरवाण, मनोहर बाग वार्ड

हम जोशीमठ में लंबे समय से रह रहे हैं। सरकार को यहीं पर सुरक्षित जगह देखकर शीघ्र ही हमारा पुनर्वास करना चाहिए।
- विजय सती, मनोहर बाग वार्ड।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें