आईआईटी में दाखिलों की प्रवेश परीक्षा जेईई एडवांस इस साल फिर सरप्राइज लेकर आई। परीक्षा पैटर्न में इतने बदलाव किए गए कि अभ्यर्थी असमंजस में नजर आए। आईआईटी ने पार्शियल मार्किंग का फार्मूला लगातार दूसरे साल लागू रखा, लेकिन कुल अंक गत वर्ष के मुकाबले इस साल छह अंक घटा दिए। इसके अलावा इस बार जेईई एडवांस में कई और बड़े बदलाव किए गए।
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रविवार को हुई जेईई एडवांस परीक्षा में सबसे पहला बदलाव छात्रों के सामने कुल अंकों का रहा। वर्ष 2014 में जेईई एडवांस 360 अंकों की हुई। वर्ष 2015 में अचानक परीक्षा के कुल अंक बढ़ाकर 504 कर दिए गए थे। 2016 में कुल अंक घटाकर 372 कर दिए गए थे, लेकिन इस साल आईआईटी ने कुल अंक घटाकर 366 कर दिए। हालांकि, इस वजह से छात्र कुछ खुश भी नजर आए। उनका मानना था कि कम अंकों वाले प्रश्नपत्रों में कामयाबी ज्यादा आसान होगी।
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आईआईटी ने 2016 में पहली बार एडवांस परीक्षा में पार्शियल मार्किंग लागू की थी। वर्ष 2015 तक अगर एक सवाल के दो विकल्प सही हैं और इनमें से छात्र ने एक विकल्प सही भरा है तो पूरा सवाल गलत माना जाता था। इस बार लगातार दूसरे साल पार्शियल मार्किंग की वजह से छात्रों को स्कोरिंग में आसानी होगी। इस साल अगर किसी सवाल के बी और सी विकल्प सही हैं और छात्र ने केवल बी विकल्प भरकर छोड़ दिया है तो उसे अंक मिलेंगे। अगर उसने बी के साथ ए (गलत) विकल्प भर दिया है तो पूरा सवाल गलत होगा।
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जेईई एडवांस परीक्षा में तीसरा सरप्राइज फैक्टर बना नेगेटिव मार्किंग। दरअसल, पेपर-1 और पेपर-2 में आईआईटी ने कुल 81 अंकों के ऐसे सवाल दिए, जिनमें कोई भी नेगेटिव मार्किंग नहीं थी। गत वर्ष 27 अंकों के ऐसे सवाल पूछे गए थे, जिनमें कोई नेगेटिव मार्किंग नहीं थी। अगर छात्र ने इनका गलत जवाब भी दिया होगा तो कोई नुकसान नहीं होगा।
इस साल आईआईटी ने कुल 366 अंकों की परीक्षा ली है। इसमें पहला पेपर 183 अंकों का आया, जिसमें 61 अंकों का फिजिक्स, 61 अंकों की केमिस्ट्री और 61 अंकों के मैथ्स के प्रश्न आए। इसी प्रकार पेपर-2 भी 183 अंकों का पूछा गया।