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अंतरराष्ट्रीय योग महोत्सव: हेलीकॉप्टर से फूल बरसा कर किया गया साधकों का स्वागत, नहीं रहा उनकी खुशी का ठिकाना, तस्वीरें

Sat, 06 Mar 2021 03:51 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, ऋषिकेश
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योग महोत्सव - फोटो : अमर उजाला
गढ़वाल मंडल विकास निगम एवं पर्यटन विभाग के संयुक्त तत्वावधान में आयेाजित अंतराष्ट्रीय योग महोत्सव के छठवें दिन गंगा तट पर उपस्थित साधकों का हेलीकॉप्टर से पुष्प वर्षा के जरिए स्वागत किया गया। उत्तराखंड पर्यटन विकास परिषद एवं गढ़वाल मंडल विकास निगम के संयुक्त तत्वावधान में ऋषिकेष की मुनिकीरेती स्थित गंगा रिजॉर्ट में अंतरराष्ट्रीय योग महोत्सव का आयोजन किया गया है। एक मार्च 2021 को कृषि मंत्री सुबोध उनियाल ने इस योग महोत्सव का शुभारंभ किया था। सात मार्च यानी रविवार को महोत्सव का समापन होना है। समापन से एक दिन  पूर्व हेलीकॉप्टर से फूल बरसा कर महोत्सव में आए योग साधकों का स्वागत किया गया। शनिवार दोपहर करीब एक बजे आयोजन स्थल के ऊपर पुष्प वर्षा की गई थी। हेलीकॉप्टर ने दो बार योग मंडप और आसपास क्षेत्र के ऊपर से उड़ान भरी और गुलाब की पंखुड़ियों की आसमान से वर्षा की। देश के विभिन्न क्षेत्रों से आए योग साधकों ने इन पलों को अपने-अपने मोबाइल में कैद कर लिया। आयोजन स्थल पर चारों ओर गुलाब की पंखुड़ियां बिखर गई। इस दौरान साधकों की खुशी से फूले नहीं समाए।

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योग महोत्सव - फोटो : अमर उजाला
इससे पहले शुक्रवार को स्वामी आत्मस्वरूपानन्द ने साधकों को विभिन्न यौगिक क्रियाओं का अभ्यास कराया। स्वामी निरंजनानन्द योग केंद्र जमुई बिहार के स्वामी आत्मस्वरूपानन्द ने साधकों को बताया कि योग हमें एक बहुमूल्य आध्यात्मिक विरासत के रूप में प्राप्त हुआ है।
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योग महोत्सव - फोटो : अमर उजाला
योग का मुख्य विषय आध्यात्मिक पथ के उच्चतम शिखर पर पहुंचना है। चौधरी बृजपाल सिंह ने योग व प्राणायाम के बारे में साधकों को बताया कि यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा एवं समाधि योग के प्रमुख तत्व है। जिसमें यम के पांच तत्व अहिंसा, सत्य, ब्रह्मचर्य, अस्तेय, अपरिग्रह प्रमुख है।

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योग महोत्सव - फोटो : अमर उजाला
कहा कि हमें मन, वचन और कर्म से अहिंसक होना चाहिए, हमारी भाषा में भी हिंसक शब्दों का प्रयोग नहीं होना चाहिए। योगाचार्य शशिकान्त दुबे ने आसन, प्राणायाम एवं ध्यान के बारे में साधकों को जानकारी दी।
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योग महोत्सव - फोटो : अमर उजाला
आचार्य विपिन जोशी ने साधकों को बताया कि उत्तराखंड आरोग्यता का हब बन गया है। देश एवं दुनिया के लोग शांति के लिए उत्तराखंड हिमालय की ओर आ रहे हैं। उत्तराखंड में सभी अनोत्तरित सवालों का जवाब मिल जाता है। जब भी कोई व्यक्ति संकट में होता है तो वह हिमालय की ओर रूख करता है।
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योग महोत्सव - फोटो : अमर उजाला
आदिकाल से ही बड़े-बड़े सन्त, महापुरुष एवं धर्मगुरूओं ने हिमालय में आकर कठिन साधना की और पूरे विश्व ऱ्को अपने ज्ञान से आलोकित किया है। देरशाम सांस्कृतिक संध्या में इंदिरा नायक ने अपने सूफी और गजल से शानदान प्रस्तुति देकर दर्शकों की जमकर तालियां बटोरी।
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