पिछले 17 बरस रामदेव के नाम हैं। इन वर्षों में उन्होंने योग को एक बार फिर से अंतर्राष्ट्रीय विषय बना दिया।
Trending Videos
विज्ञापन
2 of 9
baba ramdev
योग की धरती हरिद्वार और ऋषिकेश पुराने जमाने से रहे हैं। अब एक बार फिर यह श्रेय हरिद्वार को मिला है कि यहां के बाबा रामदेव की बदौलत योग को अंतर्राष्ट्रीय दिवस का दर्जा मिला।
विज्ञापन
3 of 9
baba ramdev
बाबा रामदेव हरिद्वार में वर्ष 1995 में आकर संन्यासी बने थे। उन्होंने कृपालु बाग आश्रम में गुरु शंकर देव से संन्यास की दीक्षा ली थी। उनकी योग साधना हिमालय में चलती रही। हरिद्वार आकर उन्होंने कनखल की तपोभूमि को अपनी रचना भूमि बनाया।
4 of 9
baba ramdev
वर्ष 2000 तक बाबा इतने लोकप्रिय हो गए कि आस पास के क्षेत्रों में उनका नाम हो गया। 2001 में बाबा ने आश्रम से बाहर निकलकर योग की पताका पूरे विश्व में फहराने का निर्णय लिया। उस दिन से आज तक बाबा ने पीछे मुड़कर नहीं देखा।
विज्ञापन
5 of 9
Baba Ramdev
उन्हीं के कारण योग नए सिरे से प्रतिष्ठित हुआ है। यहां तक की दुनिया के 193 देशों में इस समय योग किया जा रहा है। बाबा रामदेव ने अपने साथी आचार्य बालकृष्ण के साथ मिलकर योग और आयुर्वेद का एक बड़ा साम्राज्य खड़ा किया।
विज्ञापन
6 of 9
बाबा रामदेव
बाबा ने पतंजलि का योग दिया, जो आज बाबा के योग के नाम से विख्यात हो गया। इस भारत भूमि से अनेक योगी समय समय पर निकलते रहे हैं। योग को जो स्थान हरिद्वार के बाबा रामदेव ने दिलाया, वह शायद कोई भी नहीं दिला पाए।
विज्ञापन
7 of 9
modi ramdev
- फोटो : amarujala
बाबा रामदेव के प्रयत्नों से प्रधानमंत्री बनने से पूर्व भी नरेन्द्र मोदी ने संकल्प ले लिया था कि यदि वे देश की इस सर्वोच्च कुर्सी पर आए तो योग को अंतर्राष्ट्रीय मान्यता दिलाने के लिए वे अवश्य काम करेंगे। यह संकल्प भी उन्होंने बाबा की पतंजलि योगपीठ में ही लिया था।
8 of 9
modi ramdev
यह संयोग ही कहा जाएगा कि प्रधानमंत्री बनते ही मोदी ने सयुंक्त राष्ट्र के मंच पर योग का डंका बजा दिया। उनकी नीति इतनी सफल रही कि दुनिया के 140 देशों ने उसी दिन योग को मान्यता दिलाने का संकल्प सयुंक्त राष्ट्र संघ में लिया।
बाद में अनेक ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार वर्ष के सबसे बड़े दिन 21 जून को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस घोषित किया गया। तीसरे अंतर्राष्ट्रीय दिवस पर अहमदाबाद में बाबा रामदेव गिनीज बुक ऑफ वल्र्ड रिकॉर्ड में अपना नाम दर्ज ककराने जा रहे हैं। यद्यपि पिछले वर्ष उन्होंने फरीदाबाद में डेढ़ लाख लोगों से योग कराकर गिनीज बुक में स्थान पा लिया था। इस बार वे पांच लोग साधकों के माध्यम से अपना ही कीर्तिमान तोड़ेंगे।