योग को बढ़ावा देने के लिए ब्रांड एंबेसडर बनाई गईं दिलराज प्रीत कौर चार साल से गुमनाम हैं। इन चार साल में सरकार ने उन्हें न तो प्रदेश और न ही देश में कहीं योग को प्रोत्साहित करने का मौका दिया। भागदौड़ करने के बाद नौकरी तो मिली, लेकिन एक साल से वेतन नहीं मिल रहा है।
वर्ष 2015 में देव संस्कृति विवि की छात्रा दिलराज प्रीत कौर को योग दिवस के कार्यक्रम के दौरान तत्कालीन मुख्यमंत्री हरीश रावत ने योग की ब्रांड एंबेसडर नियुक्त किया था। इसके लिए उन्हें पढ़ाई करने तक प्रतिमाह 25 हजार रुपये बतौर छात्रवृत्ति और पढ़ाई पूरी होने के बाद 40 हजार रुपये मासिक वेतन पर नौकरी का वादा किया गया था। दिलराज को प्रदेश ही नहीं बल्कि पूरे देश में योग को बढ़ावा देने की जिम्मेदारी भी दी गई थी।
दिलराज का कहना है कि चार साल में एक बार भी उन्हें न तो प्रदेश के किसी भी कार्यक्रम में भेजा गया और न ही देश के दूसरे राज्यों में भेजा गया। हालांकि, भागदौड़ करने के बाद उन्हें आयुर्वेद विवि में बतौर योग शिक्षिका एवं थेरेपिस्ट की नौकरी मिल गई। 40 हजार रुपये वेतन एक साल तक मिला। अब जून 2018 से उन्हें वेतन ही नहीं दिया गया।
योग की ब्रांड एंबेसडर दिलराज प्रीत कौर से बात की गई तो उनके मन का दर्द छलक उठा। उनका कहना है कि सरकार बदल गई तो इसमें मेरी क्या खता। मैंने तो नि:स्वार्थ भाव से योग को बढ़ावा देने के बारे में सोचा था। अब मैं केवल एक योग शिक्षक बनकर रह गई हूं। 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस है। दिलराज अब अपने पुराने दिनों को याद कर रही हैं।
चूंकि दिलराज प्रीत कौर संविदा पर हैं। उनकी संविदा का मामला शासन स्तर पर लंबित है। जब तक शासन से कुछ निर्देश नहीं मिलते, तब तक कुछ नहीं कहा जा सकता है। -रामजी शरण शर्मा, कुलसचिव, आयुर्वेद विवि