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बाबा रामदेव ने विदेशी योगा को फिर से बना दिया देशी योग, यहां जानिए कैसे?

Thu, 21 Jun 2018 05:34 PM IST
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, हरिद्वार
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baba ramdev
अनेक ऋषि मुनियों ने योग को विश्वभर में प्रणीत किया। इस धरती से हमारा योग विदेशों के लिए चला था और वहां जाकर धीरे-धीरे योग से योगा में बदल गया। 20 बरस पहले रामदेव ने योग को एक बार फिर से विश्व पटल पर अपने मूल स्वरूप में लाने के प्रयास शुरू किए। आते-आते पतंजलि का वह योग एक बार फिर योगा से बदल कर योग के रूप में प्रचलित हो गया है।
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baba ramdev
उत्तराखंड की धरती ऋषियों की कर्म भूमि रही है। नया दौर आने पर आजादी के बाद इसी धर्म भूमि के साधु-संतों ने योग को विदेशों में फैलाना शुरू किया। उन योगियों में स्वामी शिवानंद, स्वामी राम, स्वामी ओंमकारानंद, महेश योगी, योगेश्वर, महेशानंद, राम मुलख आदि प्रमुख थे। प्रोफेसर एम लाल और श्याम लाल ने भी योग को फैलाने का काम किया।
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baba ramdev
जिस समय कश्मीर की धरती से धीरेंद्र ब्रह्मचारी योग को दुनिया भर में ले जा रहे थे, उस समय योग के प्रति दुनिया में फैला आकर्षण साधकों को योग के नियम, ध्यान, समाधि और अष्टांग योग की तलाश में हरिद्वार-ऋषिकेश की इस पावन भूमि पर ला रहा था। इस धरती से योग तमाम यूरोप, अमेरिका, ब्रिटेन, रूस, चीन आदि गया।

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- फोटो : amar ujala
भाषायी अंतर ने भारत के योग को पश्चिम में योगा बना दिया। कालांतर में भारतीय शिक्षण संस्थाओं में भी योगा नाम चल निकला। आधुनिक होते भारत को अंग्रेजी से प्यार होता जा रहा था और इसी कारण स्वदेश में योग के बजाय योगा प्रचलित हो गया। 
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yoga day
करीब 20 वर्ष पूर्व हरिद्वार की इस धरती पर योग की पताका नए सिरे से फैलाने वाले बाबा रामदेव का प्रादुर्भाव हुआ। उन्होंने योग और प्राणायाम को देखते ही देखते नया आयाम दे दिया। बाबा के प्रयासों का असर था कि देश का तमाम उच्च वर्ग और राजनीति अपने कमरों में टीवी के सामने बैठकर योग करने लगे। एक बार फिर दुनिया में योग का नाम योग के रूप में फैलने लगा। रामदेव के प्रयासों से देश के प्रधानमंत्री ने संयुक्त राष्ट्र संघ में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाने का प्रस्ताव रख दिया।
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Yoga Day
इस प्रस्ताव पर इतनी जल्द अमल होगा, भारत ने शायद ऐसा सोचा भी नहीं था। संयुक्त राष्ट्र संघ ने उसी वर्ष योग को अंतरराष्ट्रीय दिवस का दर्जा प्रदान कर दिया। विशेष बात यह है कि संयुक्त राष्ट्र संघ की पुस्तिका में योग को योगा नहीं बल्कि टिप्पणी देकर योग घोषित किया गया है। 21 जून को सारी दुनिया भारत के योग दिवस की चौथी जयंती मना रही है।
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