नई पीढ़ी का उनका एक ही संदेश है कि कठिन परिश्रम और मजबूत इरादे से बुढ़ापे को भी हराया जा सकता है। सखी राम उनियाल अपने जीवन के 89 बसंत पूरे कर चुके हैं। नब्बे साल की उम्र में भी वे आज के युवाओं से ज्यादा मजबूत इच्छाशक्ति वाले हैं। टिहरी जनपद के प्रतापनगर ब्लाक में सौड़ गांव के निवासी उनियाल ने खेती.बाड़ी करके अपने दो पुत्रों को अध्यापक बनाया। आज दोनों पुत्र सेवानिवृत्त होकर घर लौट आए हैं। लेकिन सखी राम उनियाल ने खेतों पर काम करना नहीं छोड़ा। वो कहते हैं कि निरंतर परिश्रम करना ही उनकी दीर्घायु का मंत्र है। आज भी ये बुजुर्ग खेतों में हल लगाता है।