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घुप अंधेरे में भी दुश्मनों के छक्के छुड़ा सकेंगे भारतीय जवान, नई तकनीक के साथ तैयार हुआ बैटल टैंक

Fri, 06 Apr 2018 04:43 PM IST
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, देहरादून
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सर्जिकल स्ट्राइक - फोटो : self
आधी रात को घुप अंधेरे में भी दुश्मनों के छक्के छुड़ाने के लिए भारतीय सेना  के लिए नई तकनीक ईजाद हुई है। ऑप्टो इलेक्ट्रोनिक्स फैक्ट्री (ओएलएफ) ने इसे 45 साल बाद भारतीय सेना के बैटल टैंक टी-72 को नई तकनीक के साथ जोड़ा है। यह टैंक रात के घुप अंधेरे में पांच किलोमीटर तक दुश्मन टैंक को देखने की तकनीक पेश की है।
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ओएलएफ में लगी प्रदर्शनी में इस प्रणाली को प्रदर्शित किया गया। अभी तक बहुत कम देशों के पास थर्मल इमेजर प्रणाली है। इस प्रणाली से रात को इंसान के शरीर से निकलने वाली गर्मी के जरिये सटीक इमेज तैयार होती है। इस तकनीक को पहले चरण में कमांडर्स थर्मल इमेजर मार्क वन टी-72 टैंक में लगाया जाएगा।
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इसके बाद दूसरे चरण में मार्क-2 तकनीक तकनीक अपनाई जाएगी। मार्क-2 विकसित होने के बाद भारतीय सेना रात को छह किलोमीटर तक दुश्मन के टैंकों को भेद सकेगी। एक अखबार में छपी खबर के मुताबिक, ओएलएफ अधिकारियों का कहना है कि, टी-72 टैंक में मार्क वन श्रेणी का कमांडर्स थर्मल इमेजर लगाया गया है।

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इसमें पांच किलोमीटर तक दुश्मन देखा जा सकता है। लेकिन पूरी तरह से सटीक आकलन तीन किलोमीटर तक होता है। उनका कहना है कि, मार्क-2 में छह किलोमीटर तक दुश्मन की हलचल देखी जा सकती है जबकि तीन किलोमीटर तक सटीक आकलन लगाया जा सकता है। मार्क वन की सप्लाई अब सेना को होने लगी है।
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सर्जिकल स्ट्राइक - फोटो : SELF
ओएलएफ के अधिकारियों का कहना है कि, नब्बे के दशक में देश में सामरिक आवश्यकताओं को देखते हुये तत्कालीन सोवियत रूस के सहयोग से भारतीय सेना के लिये नवीनतम युद्धक टैंक टी-72 व बख्तरबंद माल वाहन ‘सरथ’ का निर्माण देश में होना प्रारम्भ हुआ।
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