सीमावर्ती क्षेत्र बाड़ाहोती में चीन कई बार घुसपैठ कर चुका है। लेकिन ये भी सच है कि अगर बाड़ाहोती पर चीनी सेना हमला कर दे तो भारतीय सेना सीमा पर नहीं पहुंच पाएगी।
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चीन बॉर्डर पर तैनात ITBP निगरानी करते हुए
चमोली जिले के सीमावर्ती क्षेत्र बाड़ाहोती में मुस्तैद आईटीबीपी और सेना के जवान वर्षों से बदहाल पड़े बदरीनाथ हाईवे से जूझ रहे हैं। यहां हाईवे पर नासूर बना लामबगड़ भूस्खलन जोन सुरक्षा बलों की सुचारु आवाजाही में रोड़ा बना हुआ है।
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badrinath highway
महीने भर में ही करीब 65 घंटे तक हाईवे बाधित रहा है। बदरीनाथ हाईवे चीन सीमा को यातायात से जोड़ने वाला एकमात्र साधन है। बीआरओ (सीमा सड़क संगठन) और लोक निर्माण विभाग (एनएच) लामबगड़ के ट्रीटमेंट पर अब तक करीब पचास करोड़ रुपये खर्च कर चुके हैं, लेकिन हाईवे की हालत जस की तस बनी हुई है।
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badrinath highway block
- फोटो : amarujala
बदरीनाथ हाईवे धार्मिक के साथ ही सामरिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। बदरीनाथ धाम पहुंचने का जहां यह एक मात्र मार्ग है, वहीं चीन सीमा क्षेत्र में मुस्तैद आईटीबीपी और सेना के जवानों की आवाजाही भी इसी मार्ग से होती है। बरसात में यह मार्ग बेहद तकलीफदेह हो जाता है। जून माह से रुक-रुककर हो रही बारिश से हाईवे लामबगड़ भूस्खलन जोन में कई बार बाधित हो चुका है।
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rishikesh badrinath highway
लामबगड़ में करीब डेढ़ दशक से भूस्खलन हो रहा है। बीआरओ (सीमा सड़क संगठन) अभी तक यहां करीब 22 करोड़ रुपये खर्च कर चुका है। वर्ष 2015 में राज्य सरकार ने इसके स्थायी ट्रीटमेंट का जिम्मा लोक निर्माण विभाग (एनएच) को सौंपा था।
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landslide in rishikesh badrinath highway
एनएच की ओर से इटली की कंपनी को लामबगड़ के ट्रीटमेंट का कार्य सौंपा गया है, अभी तक कंपनी यहां करीब 27 करोड़ रुपये खर्च कर चुकी है, लेकिन लामबगड़ अभी भी मुसीबत बना हुआ है। आईटीबीपी और सेना के जवानों को कई बार लामबगड़ से देश के अंतिम गांव माणा (16 किमी) तक पैदल आवाजाही करनी पड़ रही है।
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badrinath highway block
- फोटो : amarujala
चमोली के जिला सैनिक कल्याण अधिकारी कर्नल एसके डबराल का कहना है कि बदरीनाथ हाईवे जहां देश के सर्वश्रेष्ठ धाम बदरीनाथ को यातायात से जोड़ता है, वहीं चीन सीमा क्षेत्र में सेना के जवानों की आवाजाही भी यहीं से होती है।
सुरक्षा बलों के लिए रसद और आवश्यक वस्तुएं भी इसी मार्ग से ले जायी जाती है। लिहाजा इस मार्ग के रख-रखरखाव पर सरकारों को विशेष जोर देना चाहिए। लामबगड़ भूस्खलन जोन का स्थायी ट्रीटमेंट जरूरी है। इधर, लोक निर्माण विभाग (एनएच) के अधिशासी अभियंता प्रवीण कुमार का कहना है कि लामबगड़ में चट्टान और नाले का ट्रीटमेंट कार्य जारी है। बार-बार मौसम खराब होने से कार्य में दिक्कतें आ रही हैं। जल्द ही लामबगड़ को भूस्खलन से मुक्त कर दिया जाएगा।