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...तो क्या देश का सबसे बड़ा मेट्रो प्रोजेक्ट बनाएगा उत्तराखंड!

Fri, 23 Dec 2016 12:02 PM IST
अनिल चन्दोला/ अमर उजाला, देहरादून
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उत्तराखंड में बनने वाला मेट्रो प्रोजेक्ट पहले चरण में बनने वाला देश का सबसे बड़ा प्रोजेक्ट होगा। प्रारंभिक सर्वे के अनुसार देहरादून से हरिद्वार-रुड़की और ऋषिकेश को जोड़ने वाले मेट्रो रूट की लंबाई सौ किलोमीटर से ज्यादा होगी। अगर ऐसा हुआ तो यह अब तक एक चरण में बनने वाला देश का सबसे बड़ा प्रोजेक्ट हो जाएगा। अभी तक देश में कहीं भी एक चरण में इतना बड़ा प्रोजेक्ट नहीं बना है।
 
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मेट्रो में नौकरी का मौका
देश में सबसे बड़ी मेट्रो लाइन दिल्ली में है, जिसकी लंबाई करीब 190 किलोमीटर है। मौजूदा समय में देश के नौ राज्यों में मेट्रो परियोजना गतिमान है, इसमें दिल्ली ने पहले चरण में 89.80 किमी, बंगलुरू ने 6.7 किमी, भोपाल ने 10.5 किमी, जयपुर ने 9.25 किमी, कोलकाता ने 22.3 किमी, चंडीगढ़ ने 37.57 किमी, चेन्नई ने 45.06 किमी, मुंबई ने 11.07 किमी और गुवाहाटी ने 32.4 किमी ट्रैक का ही निर्माण किया था। इसके अलावा कई अन्य राज्यों में भी परियोजना पर काम हो रहा है।
 
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metro - फोटो : अमर उजाला
दूसरी तरफ उत्तराखंड में देहरादून से हरिद्वार और ऋषिकेश के बीच चलने वाली मेट्रो के लिए जो प्रारंभिक सर्वे हुआ, उसमें रूट की लंबाई 84 किमी आई। अब इसमें रुड़की क्षेत्र भी जुड़ने से लंबाई करीब सौ किमी होनी तय है। ऐसे में यह परियोजना पहले चरण में बनने वाली देश की सबसे लंबी योजना होगी। उत्तराखंड में प्रस्तावित मेट्रो प्रोजेक्ट की लागत प्रति किलोमीटर के हिसाब से सबसे ज्यादा होगी। अब तक देश में जितने भी प्रोजेक्ट बने हैं, उनकी प्रति किमी लागत इससे कम आंकी गई है। प्रोजेक्ट में प्रति किलोमीटर करीब 250 करोड़ रुपये का खर्च आने का अनुमान है। पूरी परियोजना पर 25 हजार करोड़ से अधिक का खर्च का अनुमान है।
 

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मेट्रो
राज्य सरकार देहरादून-हरिद्वार-ऋषिकेश और रुड़की के बीच मेट्रो रेल चलाने का दावा तो कर रही है, लेकिन उसके लिए पर्याप्त सवारियां कहां से आएगी, इसका जवाब किसी के पास नहीं है। जिन रूटों पर यह परियोजना प्रस्तावित है, वहां कुल मिलाकर जितने लोग रोजाना सफर करते हैं, उतने अकेले मेट्रो को चाहिए। देहरादून और ऋषिकेश के बीच रोडवेज की रोजाना करीब 70 से 80 बसें चलती हैं, जिनमें करीब तीन हजार लोग सफर करते हैं। इतनी ही प्राइवेट बसों का संचालन भी होता है, जिसमें करीब इतने ही यात्री सफर करते हैं। मैक्सी-कैब व अन्य छोटे वाहनों से करीब एक हजार लोग रोजाना सफर करते हैं। इस लिहाज से इन दोनों शहरों के बीच रोजाना करीब सात हजार यात्री सफर करते हैं। वहीं देहरादून और हरिद्वार के बीच रोजाना रोडवेज की करीब 325 बसें चलती है।
 
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बस - फोटो : file photo
इसमें हरिद्वार होते हुए कुमाऊं और अन्य स्थानों से आने व जाने वाली बसें भी शामिल हैं। इनसे रोजाना करीब 12 हजार यात्री आवागमन करते हैं। करीब तीन सौ प्राइवेट बसों से करीब दस हजार यात्री भी सफर करते हैं। वहीं छोटे वाहनों से भी करीब दो हजार लोग रोजाना सफर करते हैं। इस अनुमान के अनुसार प्रस्तावित मेट्रो रूट पर रोजाना करीब तीस हजार लोग आवाजाही करते हैं। अन्य राज्यों में चल रही मेट्रो परियोजनाओं को आधार बनाया जाए, तो अधिकांश में यात्रियों की संख्या 30 हजार से अधिक है।
 
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देहरादून से हरिद्वार-ऋषिकेश से ज्यादा लोग आंतरिक मार्गों पर सफर करते हैं। शहर में कुल 13 रूटों पर 270 सिटी बसें चलती हैं। इसके अलावा करीब एक हजार विक्रम और ऑटो चलते हैं। इनमें औसतन 70 हजार से एक लाख लोग रोजाना सफर करते हैं, लेकिन इनमें से ज्यादातर बहुत कम दूरी के लिए वाहनों का इस्तेमाल करते हैं।
 
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मेट्रो - फोटो : amar ujala
देश की मेट्रो पर एक नजर::
दिल्ली मेट्रो: लाइनों की संख्या-06, स्टेशन-135, रोजाना औसतन सवारियां- 16 लाख, शुरुआत -24 दिसंबर 2002, कुल लंबाई- 191 किमी
जयपुर मेट्रो: लाइनों की संख्या-02, स्टेशन-29, रोजाना औसतन सवारियां- करीब 12 लाख, शुरुआत -2014, कुल लंबाई- 32.5 किमी
चंडीगढ़ मेट्रो: लाइनों की संख्या-02, स्टेशन-30, रोजाना औसतन सवारियां- तीन लाख, कुल लंबाई- 37.57 किमी
चेन्नई मेट्रो: लाइनों की संख्या-07, स्टेशन-18, रोजाना औसतन सवारियां- चार लाख, कुल लंबाई- 45.046 किमी
बंगलुरू मेट्रो: लाइनों की संख्या-02, स्टेशन-41, रोजाना औसतन सवारियां- 50 हजार, कुल लंबाई- 42.3 किमी
 
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सीएम हरीश रावत - फोटो : AmarUjala
पूरी फिजिबिलिटी चेक करने के बाद ही मेट्रो योजना तैयार की गई है। पैसों की कोई दिक्कत नहीं है। 20 फीसदी धन केंद्र सरकार देती है। बाकी का धन सरकार लैंडिंग एजेंसी से लोन लेकर जुटाएगी। बीओटी का विकल्प भी खुला है। यूपी की तुलना में प्रति किमी लागत इसलिए कम आएगी क्योंकि आधे कॉरिडोर में कोई अड़चन नहीं है। इसकी वाइबिलिटी बनाने के लिए इसे राष्ट्रीय राजमार्ग के साथ बनाया जाएगा। देहरादून से विकासनगर को जोड़ने की एक वजह यह भी है।
- हरीश रावत, मुख्यमंत्री

सरकार ने दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन के साथ करार किया है। डीएमआरसी एक माह में इंसेप्शन रिपोर्ट तैयार करेगी। इसके बाद अगले करीब पांच माह में डीपीआर तैयार की जाएगी। परियोजना की फिजिबिलिटी का प्रारंभिक सर्वे किया गया है। करीब 84 किमी का रूट चिह्नित हुआ है। डीएमआरसी अंतिम तौर पर रूट निर्धारित करेगी।
- डा. आर मीनाक्षी सुंदरम, मुख्य प्रशासक, उडा
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