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उत्तराखंड स्थापना दिवस के मौके पर द्रोण नगरी में पहुंचे देश के दिग्गज, दिया ये संदेश

Sun, 05 Nov 2017 09:10 PM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
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17 साल की उम्र पूरी कर चुका उत्तराखंड जवानी की दहलीज पर है। इस युवा उत्तराखण्ड की दशा और दिशा बदलने का समय आ गया है। स्थापना दिवस के मौके पर मुख्यमंत्री आवास पर आयोजित रैबार कार्यक्रम में कोस्टगार्ड के डायरेक्टर जनरल राजेन्द्र सिंह ने यह संदेश दिया। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड के चहुमुखी विकास के लिए गुणवत्तापरक शिक्षा, स्वच्छता, स्वरोजगार पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। समृद्ध राज्य बनाने के लिए युवाओं में ईमानदारी, कर्तव्यनिष्ठा एवं कड़ी मेहनत के संस्कार देना भी जरूरी है। मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने रविवार को मुख्यमंत्री आवास के जनता मिलन हॉल में रैबार कार्यक्रम का शुभारम्भ किया। उद्घाटन सत्र में मुख्यमंत्री ने कहा कि रैबार का मुख्य उद्देश्य है कि हम सब मिलकर राज्य के सर्वागींण विकास के लिए एकजुट होकर सोचें और राज्य को तीव्र विकास की धारा से जोड़ें। उन्होंने कहा राज्य स्थापना के 18वें साल में प्रवेश कर रहा है।
 
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उन्होंने आशा व्यक्त की कि राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठित पदों पर आसीन उत्तराखण्ड मूल के प्रतिष्ठित लोगों के साथ इस बारे में गहनता के साथ चर्चा होगी। कार्यक्रम में मौजूद प्रधानमंत्री के सचिव भाष्कर खुल्बे ने कहा कि राज्य के विकास के लिए हम क्या कर सकते हैं, इसके लिए सबको एकजुट होकर चिंतन एवं मंथन कर कार्य करने होंगे। उन्होंने कहा कि राज्य के तीव्र विकास के लिए कौशल विकास पर विशेष बल देना होगा। उन्होंने कहा कि क्षेत्रीय आवश्यकताओं की मैपिंग कर उसके अनुरूप योजना बनानी होगी। हर जिले के लिये कम से कम अगले 10 वर्ष की आवश्यकताओं की मैपिंग की जानी चाहिए। पर्वतीय जनपदों में वोकेशनल ट्रेनिंग की जरूरतों का अध्ययन कर उसकी व्यवस्था की जाए। पाठ्यक्रम में उत्तराखण्ड के पर्यटन एवं हॉट्रिकल्चर को जोड़ा जाए। राजधानी और अन्य शहरों में स्वच्छता पर भी ध्यान देना होगा। इससे निवशकों और पर्यटकों में अच्छा संदेश जाता है। रेलवे बोर्ड के चेयरमैन अश्विनी लोहानी ने कहा कि उत्तराखण्ड के विकास के लिए पर्यटन को बढ़ावा देना होगा। उत्तराखण्ड को भारत का स्विट्जरलैण्ड बनाने के लिए नए हिल स्टेशनों को डेवलप करना जरूरी है एवं उनका व्यापक स्तर पर प्रचार-प्रसार भी जरूरी है। हिल स्टेशनों के लिए मास्टर प्लान की आवश्यकता पर भी बल दिया।

 
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पलायन आयोग के उपाध्यक्ष एसएस नेगी ने कहा कि उत्तराखण्ड पहला राज्य है, जहां पलायन की समस्याओं के निदान के लिए पलायन आयोग का गठन किया गया है। उन्होंने कहा कि पर्वतीय क्षेत्रों में पलायन तेजी से हो रहा है। राज्य में 968 गांव खाली हो चुके हैं तथा 1000 गांव में 100 से कम लोग है। अल्मोड़ा एवं पौड़ी में तेजी से पलायन हुआ है। पलायन को रोकने के लिए पर्वतीय क्षेत्रों में रोजगार, मानव संसाधनों एवं मूलभूत आवश्यकताओं पर बल देना होगा। आईएफएस अधिकारी आलोक डिमरी ने कहा कि समय के साथ विकास की परिभाषा भी बदल रही है।

 

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आर्मी चीफ जनरल बिपिन रावत ने रविवार को उत्तराखंड में पर्यटन सुविधाओं के विस्तार पर नए ढंग से बात रखी। उन्होंने कहा कि कई ऐसे क्षेत्र पहाड़ में हैं, जो पर्यटन के लिए नहीं खुल पाए हैं। उन्हें खोले जाने की आवश्यकता है। मगर पर्यटन को बढ़ाते हुए संस्कृति को बचाने पर भी ध्यान देना होगा। उन्होंने कहा कि पहाड़ में स्कूली शिक्षा के अलावा उच्च शिक्षा के केंद्र खोले जाने की भी आवश्यकता है। सीएम आवास में रैबार कार्यक्रम के समापन सत्र में आमी चीफ बिपिन रावत ने कहा कि ट्रेकिंग और माउंटेन बाइकिंग जैसे क्षेत्रों के जरिये पर्यटन को बढ़ावा दिया जाए। उन्होंने पहाड़ में पलायन के प्रमुख कारणों शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं के अभाव पर भी विस्तार से बात रखी। प्रख्यात गीतकार प्रसून जोशी ने कहा कि पहाड़ की महिलाओं में संघर्ष की क्षमता है। प्रकृति संघर्ष और जीवटता सिखाती है, परंतु चालाकी नहीं। उन्होंने कहा कि पर्यटन और पर्यावरण के मध्य संतुलन होना चाहिए। उत्तराखंड के लोगों की रचनात्मकता को देखते हुए यहां पर मीडिया एवं क्रिएटिव आर्ट्स का एक संस्थान खोला जाना चाहिए। उन्होंने ब्रांड उत्तराखंड विकसित करने की बात भी कही।
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रैबार के प्रथम विशेष सत्र ‘‘उत्तराखण्ड के दो अनमोल रत्न-पर्यटन और पर्यावरण’’ के शुभारम्भ के अवसर पर सचिव पर्यटन दिलीप जावलकर ने ‘उत्तराखण्ड : पर्यटन व पर्यावरण के क्षेत्र में सम्भावनाएं, चुनौतियां व रणनीतियां’ विषय पर प्रस्तुतीकरण दिया। जावलकर ने कहा कि राज्य में पर्यटन को स्थानीय आर्थिकी से जोड़ने, 13 जिले-13 नये पर्यटन स्थल, केदारनाथ व मसूरी रोपवे निर्माण, स्थानीय उत्पादों व पर्यटक स्थलों की मार्केटिंग व ब्राण्डिंग आदि पर विशेष फोकस किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि विभाग मुख्य रूप से दो रणनीतियों पर कार्य करने की तैयारी में है, पहला पलायन को रोकने में पर्यटन किस प्रकार सहायता कर सकता है? और इकोलोजी को इकॉनोमी से किस प्रकार पर्यटन को जोड़ा जा सकता है।
 
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पर्यावरणविद् अनिल जोशी ने सत्र को सम्बोधित करते हुए कहा कि राज्य सरकार को इस प्रकार की सामूहिक चर्चा के आयोजन के लिए बधाई व प्रंशसा की पात्र है। हमें गांव के विकास व उत्तराखंड की ब्रांडिग पर विशेष ध्यान देना होगा। हमें मात्र जीडीपी पर ही ध्यान नही देना होगा बल्कि पर्यावरण सरंक्षण पर भी फोकस रखना होगा। हमें अपने ग्रोथ इंडिकेटर्स बदलने की आवश्यकता है। पर्यावरण व पर्यटन में संतुलन बनाने की भी जरूरत है। कार्यक्रम के अन्त में वन मंत्री डा. हरक सिंह रावत कहा कि हमें पलायन को रोकने के लिए अपने गांवों को बसाने व कृषि प्रोत्साहन पर ध्यान देना होगा। राज्य में धार्मिक पर्यटन कि अलावा भी अपार संभावनाएं है।
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