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Independence Day: जनसभाओं से गूंज उठती थी मसूरी, बापू यहीं बनाते थे स्वतंत्रता आंदोलन को धार देने की रणनीति

Mon, 15 Aug 2022 10:58 AM IST
अलका त्यागी सुनील रमेश सिलवाल, अमर उजाला, मसूरी
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मसूरी में महात्मा गांधी - फोटो : अमर उजाला
राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को मसूरी से बेहद लगाव था। उन्होंने यहां सिल्वर्टन ग्राउंड में जनसभा के साथ ही प्रार्थना सभाएं कीं और लोगों को अहिंसा का पाठ पढ़ाया। मसूरी में वह स्वतंत्रता आंदोलन की धार को तेज करने भी आया करते थे।

उन्होंने यहां लोगों से स्वतंत्रता आंदोलन में शामिल होने की भी अपील की थी। स्वतंत्रता आंदोलन को मजबूत बनाने के लिए वह यहां कई बड़े नेताओं के साथ बैठकें भी किया करते थे। महात्मा गांधी ने अपनी आत्मकथा में भी मसूरी शहर का जिक्र किया है।

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मसूरी का सिल्वर्टन ग्राउंड आज भी लोगों को महात्मा गांधी की मौजूदगी का अहसास कराता है। वैसे तो मसूरी की नींव अंग्रेज अफसर कैप्टन यंग ने रखी थी, लेकिन इसी मसूरी ने अंग्रेजों को भारत से खदेड़ने में अहम भूमिका निभाई थी। मसूरी वह स्थान है, जहां महात्मा गांधी स्वतंत्रता आंदोलन की गति को तेज करने के लिए रणनीति बनाने को आया करते थे।

यहां वह कई बड़े नेताओं के साथ घंटों बैठक कर गुलामी की जंजीरों को तोड़ने के लिए चर्चा किया करते थे। उत्तर भारत में मसूरी और शिमला दो ऐसे हिल स्टेशन थे, जहां अंग्रेजी साम्राज्य की जड़ें काफी गहरी और मजबूत थीं।
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मसूरी में महात्मा गांधी - फोटो : अमर उजाला
कहा जाता है कि मसूरी की मालरोड पर जब अंग्रेज अफसर घूमने निकलते थे तो उस समय स्थानीय लोग अपने घरों में छिप जाते थे। इस लिहाज से भी महात्मा गांधी का मसूरी आकर आंदोलन की योजना बनाना बहुत मायने रखता था।
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मसूरी में महात्मा गांधी - फोटो : अमर उजाला
महात्मा गांधी पहली बार अक्तूबर 1929 में मसूरी पहुंचे थे। तब स्थानीय लोगों ने महात्मा गांधी का भव्य स्वागत किया था। उस समय महात्मा गांधी हैप्पी वैली में बिडला हाउस में दो दिनों के लिए रुके थे। दूसरी बार महात्मा गांधी 28 मई 1946 में मसूरी आए थे। वह करीब दस दिनों तक हैप्पी वैली में बिडला हाउस में रुके थे। इस दौरान उन्होंने मसूरी के सिल्वर्टन ग्राउंड में जनसभा के साथ ही प्रार्थना सभा की और लोगों को अहिंसा का पाठ पढ़ाया।

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राष्ट्रपिता महात्मा गांधी - फोटो : gandhi.gov.in
इतिहासकार गोपाल भारद्वाज ने बताया कि महात्मा गांधी मसूरी दौरे के दौरान कांग्रेस नेता पुष्कर नाथ तन्खा से मिलकर देश के अन्य बड़े नेताओं के साथ बैठक किया करते थे। उन्होंने बताया कि मसूरी दौरे के दौरान महात्मा गांधी ने हाथ रिक्शा को लेकर अपनी आपत्ति दर्ज कराई थी। महात्मा गांधी ने कहा था कि हाथ रिक्शा से आदमी, आदमी को खींचता है जो ठीक नही है, इस प्रथा को बंद करना चाहिए।
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महात्मा गांधी - फोटो : फाइल फोटो
उन्होंने तत्कालीन नगर पालिका को इसके खिलाफ ज्ञापन भी दिया था। बताया कि महात्मा गांधी को मसूरी दौरे के दौरान स्थानीय लोगों ने चांदी की डांडी और रिक्शा मॉडल भेंट किया था। महात्मा गांधी ने चांदी की डांडी और हाथ रिक्शा मॉडल को उसी समय नीलाम कर दिया और नीलामी से जो आठ सौ रुपये मिले थे, उसे खादी उद्योग से जुड़े लोगों को दान कर दिया था।
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