आखिर ऐसा क्या हुआ कि 23 मार्च को दिल्ली में अनशन की तैयारी कर रहे अन्ना हजारे ने सबके सामने जान देने की धमकी डाली।
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anna hazare
किसानों की समस्याएं और अन्य मुद्दों को लेकर 23 मार्च को दिल्ली में अनशन की तैयारी कर रहे अन्ना हजारे ने साफ किया कि या तो मांगे मनवाएंगे या फिर जान दे देंगे। अन्ना ने केंद्र सरकार को किसानों के बजाय उद्योगपतियों की चिंता करने वाली बताया। कहा कि भ्रष्टाचार रोकने का दावा करने वाली केंद्र सरकार ने लोकपाल को ही कमजोर करने का काम किया है।
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रामलीला मैदान में आयोजित जनसभा में अन्ना के कई रूप देखने को मिले। एक बुजुर्ग की तरह युवाओं से मुखातिब अन्ना ने करीब एक घंटे के भाषण में अपने जीवन का पूरा खाका खींचा और अपने दिल्ली अभियान के मुख्य बिंदु सामने रखे। अन्ना ने कहा कि हर राज्य में कृषि मूल्य आयोग गठित है। ये आयोग दिल्ली को अपनी संस्तुति भेजते हैं, लेकिन दिल्ली में बैठे शुक्राचार्य इनमें 50 प्रतिशत तक की कमी कर देते हैं। इन आयोगों पर से केंद्र सरकार का नियंत्रण पूरी तरह से खत्म होना चाहिए।
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पिछले 22 साल में 22 लाख किसान आत्महत्या कर चुके हैं जबकि इस दौरान एक भी उद्योगपति ने आत्महत्या नहीं की। फिर भी केंद्र सरकार किसानों की बजाय जीएसटी, नोटबंदी की चिंता में उलझी हुई है। अन्ना ने कहा कि भ्रष्टाचार को सहन न करने का दावा करने वाली केंद्र सरकार ने लोकपाल कानून को कमजोर करने का काम किया। उन्होंने चुनाव सुधार पर भी जोर दिया और कहा कि चुनावों में चुनाव चिह्न का प्रयोग पूरी तरह से खत्म होना चाहिए।
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Anna Hazare on Student Movement against SSC
23 मार्च को दिल्ली में प्रस्तावित प्रदर्शन में शामिल होने का आह्वान करते हुए अन्ना ने कहा कि वह किसानों, लोकपाल और चुनाव सुधार के मुद्दे पर अनशन पर बैठेंगे। जब तक इन समस्याओं का समाधान नहीं हो जाता उनकी लड़ाई जारी रहेगी। जनसभा में दिल्ली से आए यशवंत प्रकाश ने कहा कि एनपीए दस लाख करोड़ रुपये हो गया है और सबको 12 लाख रुपये देने का दावा करने वाली सरकार हर आदमी के खाते से आठ हजार रुपये ले लिए हैं। जनसभा में आयोजक सुशील भट्ट ने कहा कि 23 मार्च को हल्द्वानी से भी अधिक से अधिक लोग दिल्ली पहुंचेंगे।
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समाजसेवी अन्ना हजारे।
- फोटो : amar ujala
23 मार्च को दिल्ली चलो अभियान के सिलसिले में सोमवार को हल्द्वानी पहुंचे अन्ना ने कई मुद्दों पर सीधे तो कुछ मुद्दों पर चुटकी लेने वाले अंदाज में बात की। अन्ना में अपने आंदोलन को सियासत से बचाए रखने की कसक दिखाई दी और वे यहां तक कह गए कि अब उन्होंने पुख्ता इंतजाम किया है कि कोई दूसरा केजरीवाल न बन पाए। उन्होंने भ्रष्टाचार के मामले में कांग्रेस को स्नातक तो भाजपा को डाक्टरेट की उपाधि दी।
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अमर उजाला से खास बातचीत में अन्ना ने कहा कि वह दो बार दिल्ली में अनशन पर बैठे हैं और दोनों बार सरकारें चली गईं। इस बार भी ऐसा ही होगा। भाजपा ने चुनाव के वक्त एक नारा दिया था कि न भय न भ्रष्टाचार, अबकी बार मोदी सरकार। मगर यहां तो भ्रष्टाचार और बढ़ गया। लोकपाल में संशोधन ही इसलिए किया गया। भ्रष्टाचार के मामले में कांग्रेस स्नातक तो भाजपा को डाक्टरेट की उपाधि हासिल है। अन्ना ने कहा कि वो चाहते हैं कि किसानों को फसल का सही दाम मिले, लोकपाल कानून बने, लोकायुक्त हर राज्य में तैनात हों और इसके लिए लड़ाई लड़ने का वक्त आ गया है। उन्होंने कृषि मूल्य आयोग को संवैधानिक दर्जा देने की मांग की और कहा कि सरकारें फसलों का मूल्य ठीक से नहीं तय करतीं।
अन्ना ने कहा कि आंदोलन का सहारा लेकर राजनीतिक रोटियां सेंकने वाले लोगों से अब मैं सावधान हो गया हूं। कार्यकर्ताओं से सदस्यता ग्रहण करते वक्त 100 रुपये के स्टैंप पेपर में लिखवाऊंगा कि मैं भविष्य में किसी राजनीतिक संगठन से संबंध नहीं रखूंगा... ताकि और केजरीवाल न बन पाएं और यदि कोई ऐसा करता है तो कोर्ट के चक्कर कटवाऊंगा। अन्ना ने युवाओं को कामयाबी का सूत्र बताते हुए कहा कि अच्छा काम करने वाले किसी परिचय के मोहताज नहीं होते। तब तक काम करते रहो जब तक वह दूसरों के लिए मिसाल न बन जाए। अन्ना का मानना है कि चुनाव जीतने के बाद मोदी पहले जैसे नहीं रहे। उन्हें अब आम लोगों से वास्ता नहीं और न ही मोदी उनके लिखे पत्रों का ही जवाब देते हैं। इन तीन वर्षो में प्रधानमंत्री मोदी को तकरीबन 40 पत्र लिखे मगर एक का भी जवाब नहीं आया। एक सवाल के जवाब में अन्ना ने कहा कि हमारे देश में सरकार गिरने से डरती हैं, आंदोलन से नहीं। 23 मार्च का आंदोलन कुछ खास होगा और इस बार सरकार को झुकना ही होगा।