‘कुछ तो मजबूरियां रही होंगी, यूं कोई बेवफा नहीं होता’। मशहूर शायर डॉ. बशीर बद्र की यह पंक्तियां देहरादून में हुई हत्या की वारदात पर सटीक बैठती है। तलाकशुदा पति का अपने हाथों खून बहाने वाली सलमा के दिलो-दिमाग में गय्यूर खान के खिलाफ नफरत का गुब्बार था। वह कहती हैं कि जिंदगी में एतबार के बदले सिर्फ विश्वासघात ही मिला। जो भी किया मजबूरी में किया। इसके उसे अफसोस भी नहीं है। पुरकाजी (मुजफ्फरनगर, उत्तरप्रदेश) के गय्यूर खान के साथ जिंदगी जीने का सपना संजोने वाली सलमा सोमवार को उसी जीवनसाथी के कत्ल में पुलिस हिरासत में थी।