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देखिए, कैसे मौत के करीब ला रही HIV/AIDS की दवाएं

Thu, 03 Dec 2015 08:13 AM IST
अनिल चंदोला/ अमर उजाला, देहरादून
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एचआईवी (ह्यूमन इम्यूनोडिफिसिएंशी वायरस) एड्स के संबंध में कई तरह के जागरूकता कार्यक्रम चलाए जाने के बावजूद स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।
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उत्तराखंड स्वास्थ्य विभाग के ताजा आंकड़ों पर गौर करें तो एचआईवी से पीड़ित लोगों की मृत्यु दर में बढ़ोतरी हो रही है। जनवरी से अक्तूबर तक 203 मरीजों की मौत हो चुकी है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 24 अधिक है।
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स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों पर यकीन करें तो साल 2006 से अब तक कुल 1013 एचआईवी और एड्स पीड़ितों की मौत हो चुकी है। इनमें से 270 ऐसे मरीज ऐसे थे, जो एआरटी सेंटर से नियमित दवाएं नहीं ले रहे थे।

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जबकि इसी अवधि में एआरटी सेंटर से नियमित दवा लेने वाले कुल 743 मरीजों की मौत हुई। इसी दौरान 23 बच्चों, 23 बच्चियों की मौत हुई। इनमें से 10 की मौत 2014 में हुई, जबकि 2015 में अक्टूबर तक छह बच्चों की मौत हो चुकी है।
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एक्वायर्ड इम्यूनोडिफिसिएंशी सिंड्रोम (एड्स) अपने आप में कोई बीमारी नहीं है। एचआईवी प्रभावित होने के बाद पीड़ित की प्रतिरोधक क्षमता धीरे-धीरे कम होने लगती है। इससे कोई भी बीमारी पीड़ित को बहुत तेजी से घेर लेती है। एड्स होने के बाद पीड़ित को बीमारियों से पीड़ित होने का खतरा बहुत अधिक बढ़ जाता है।
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यूसैक्स के अपर परियोजना निदेशक डॉ. कैलाश जोशी का कहना ‌है कि एचआईवी पीड़ित की रोग प्रतिरोधक क्षमता धीरे-धीरे कम हो जाती है। ऐसे में पीड़ित लगातार बीमारी की घेरे में आ जाता है और उस पर दवाएं भी एक समय के बाद असर नहीं करती है। यही कारण है कि साल दर साल एड्स पीड़ितों मृत्यु दर में इजाफा हो रहा है। (स्टोरी : अनिल चंदोला)
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