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कलियुग के अंत में एक हो जाएंगे बदरी धाम के ये दोनों पर्वत!

Wed, 18 Nov 2015 08:23 AM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, देहरादून
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चार धामों में से एक भगवान बदरीनाथ का मंदिर नर-नारायण पर्वत के बीच बसा हुआ है। कहा जाता है कि कलियुग के अंत में ये दोनों पर्वत मिलकर एक हो जाएंगे। तस्वीरों में देखिए, बदरीनाथ धाम के इतिहास से जुड़ी कुछ रोचक बातें...
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कलियुग के अंत में जब एक हो जाएंगे भगवान बदरीनाथ के दोनों पर्वत!

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द्वापर युग में यहां भगवान बदरी का विग्रह रूप प्रकट हुआ और इसी रूप में भगवान यहां निवास करते हैं। कहते हैं कि कलियुग के अंत में नर-नारायण पर्वत एक हो जाएंगे। इससे बद्रीनाथ का मार्ग बंद हो जाएगा, लोग भगवान बदरी के दर्शन नहीं कर पाएंगे।
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इस घटना से जुड़ी एक मान्यता यह भी है कि जोशीमठ में जहां शीतकाल में बद्रीनाथ की चलमूर्ति रहती है वहां भगवान नृसिंह का एक मंदिर है।

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वहां शालीग्राम शिला में भगवान नृसिंह का एक अद्भुत विग्रह है। इस विग्रह की बायीं भुजा पतली है और समय के साथ यह और भी पतली होती जा रही है। जिस दिन इनकी कलाई टूट जाएगी उस दिन नर-नारायण पर्वत एक हो जाएंगे।
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बदरीनाथ धाम के बारे में एक मान्यता यह भी है कि जो बद्रीनाथ का दर्शन करता है उनका पुनर्जन्म नहीं होता है।
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यह भगवान विष्णु का दूसरा वैकुंठ यानी निवास स्थान है। इस धाम के विषय में पुराणों में उल्लेख मिलता है कि सतयुग में यहां भगवान विष्णु का साक्षात दर्शन हुआ करता था।
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शास्त्रों में वर्तमान बद्रीनाथ यानी बद्री विशाल धाम को भगवान का दूसरा निवास स्थान बताया गया है। इससे पहले भगवान आदि बद्री धाम में निवास करते थे।
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भविष्य बद्री जोशीमठ से 6 मील की दूरी पर कैलास की ओर जाने वाले मार्ग पर स्थित है। यहां मंदिर के पास एक शिला है, इस शिला को ध्यान से देखने पर भगवान की आधी आकृति नज़र आती है। जब यह आकृति पूर्ण रूप ले लेगी तब यहीं ब्रदीनाथ के दर्शन का लाभ प्राप्त किया जाएगा।
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