ग्लेशियर
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ग्लेशियर पिघलकर सिकुड़ रहे हैं और छोटे स्रोत सूखकर अपना आस्तित्व खो रहे हैं। इससे पर्वतीय क्षेत्रों में सिंचाई और पेयजल की किल्लत बढ़ी है। ग्लोबल वार्मिंग से हिमालय की वनस्पतियां, जीव जंतु अपना अनुकूलन स्थापित नहीं कर पा रहे हैं, इससे उनके प्रजनन और संख्या में कमी आ रही है। जल स्रोतों के सूखने से जैव विविधता का भी हृस हो रहा है।