उत्साह और रोमांच के बीच पिथौरागढ़ की सोर के कुमौड़ गांव का प्रसिद्ध हिलजात्रा उत्सव संपन्न हो गया। लखिया भूत और उसे रस्सियों में जकड़े दो गणों के मैदान में आते ही लोग रोमांचित हो उठे। हिलजात्रा के मुख्य पात्र लखिया को देखने के लिए 25 हजार से अधिक लोगों की भीड़ जुटी।
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- फोटो : अमर उजाला
बुधवार को पिथौरागढ़ के कुमौड़ गांव में हिलजात्रा के आयोजन को लेकर सुबह से ही तैयारियां शुरू हो गईं थीं। दोपहर बाद लोगों का कुमौड़ के ऐतिहासिक मैदान में पहुंचना शुरू हो गया। चार बजने से पहले ही मैदान और मुख्य मार्ग लोगों से गया। लोग घरों की छतों पर जमा हो गए।
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शाम को साढ़े चार बजे उत्सव शुरू हुआ। पूर्व वित्त मंत्री स्व. प्रकाश पंत के पुत्र सौरभ पंत ने उत्सव का शुभारंभ किया। सबसे पहले हिलजात्रा मैदान में रोपाई करने वाली महिलाओं का दल उतरा। इसके बाद गल्या बल्द (आलसी बैल) की जोड़ी आई। गीत गाती पुतारियां, बच्चों की टोलियां भी आकर्षण का केंद्र रहीं। इसके बाद ढोल-नगाड़ों के बीच ऐतिहासिक मैदान में मुखौटा पहने लखिया ने प्रवेश किया।
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लखिया और उसे रस्सियों में जकड़े दो गणों के मैदान में आते ही लोग रोमांचित हो उठे। महिलाओं और स्थानीय लोगों ने लखिया की पूजा की। लखिया ने मैदान में एकत्र हजारों की भीड़ को आशीर्वाद दिया। इसके बाद लखिया मैदान से चला गया। हिलजात्रा उत्सव में सुरक्षा व्यवस्था के लिए पुख्ता इंतजाम किए गए थे। कोतवाल ओपी शर्मा के नेतृत्व में आयोजन स्थल और आसपास पुलिस के जवान तैनात रहे।
लखिया की भूमिका नीरज महर ने निभाई। गण की भूमिका में पवन महर और प्रदीप महर थे। गल्या बल्द सूरज महर और नकुल महर बने। यशवंत महर, गोपू महर, कुंडल महर, चंद्रशेखर महर, गजेंद्र महर, शमशेर महर, त्रिलोक महर।