देहरादून की वादियों में जहां एक ओर पर्यटक प्रकृति के बीच शांति की खोज में आते हैं, वहीं देहरादून और मसूरी की बीच स्थित भूतिया टनल लोगों को खौफजदा करती है।
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haunted tunnel
स्थानीय लोगों के मुताबिक देहरादून और मसूरी की बीच स्थित इस टनल से रात को चीखने की आवाज सुनाई देती है।
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शाम ढलने के बाद लोग इस सुरंग के आसपास जाने से परहेज करते हैं।
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राजपुर शहंशाही आश्रम से कुछ आगे पुराने मसूरी टोल पर सुरंग बनाने का काम शुरू किया गया।
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लेकिन बताया जाता है कि सुरंग बनाते समय कई मजदूर दबकर मर गए और अन्य मजदूरों ने काम करना छोड़ दिया। तब से यह जगह सुनसान पड़ गई।
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दो साल मसूरी टोल से आगे सुरंग बनाने का काम भी चला। लेकिन वर्ष 1924 में इस प्रोजेक्ट को रोक दिया गया।
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बकौल इतिहासकार गोपाल भारद्वाज वर्ष 1921 में हिंदुस्तान के कुछ राजा-रजवाड़ों ने अंग्रेजों के साथ मिलकर मसूरी-देहरा ट्राम वे कंपनी बनाई।
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कंपनी ने 23 लाख रुपए की अनुमानित लागत से देहरादून से मसूरी रेल लाइन बिछाने का काम शुरू किया था।