हरिद्वार
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काल के प्रारंभिक खंड में महाप्रतापी राजा श्वेत ने वर्तमान हरकी पैड़ी के समीप पर्वत पर वर्षों बैठकर तपस्या की थी। उनका शरीर जर्जर होता गया। राजा श्वेत हड्डियों का ढांचा बन गए, लेकिन तप न छोड़ा। उनकी बेहद कठिन तपस्या को देखकर त्रिदेव भगवान ब्रह्मा, विष्णु और महेश ने एक साथ आकर श्वेत को दर्शन दिए। स्कंद पुराण के केदारखंड में इसका व्यापक उल्लेख है।