सातों शैव संन्यासी और किन्नर अखाड़े का पहला शाही स्नान आस्था और परंपरा की डुबकी के साथ सकुशल संपन्न हो गया है। इस दौरान साधु-संतों में जबर्दस्त उल्लास और उत्साह देखने को मिला। नागा संन्यासी और किन्नर संत शाही स्नान की शान रहे। हाथों में डमरू-त्रिशूल, शरीर में रुद्राक्ष की अनगिनत मालाएं धारण किए नागाओं और किन्नरों की ब्रह्मकुंड में डुबकी के साथ हर-हर महादेव के जयघोष से हरकी पैड़ी गूंज उठी। संतों में आस्था के साथ देशभक्ति का जुनून भी दिखा और उन्होंने तिरंगा हाथ में लेकर स्नान किया। भारत माता की जय और हर-हर महादेव के जयकारों से हरकी पैड़ी गूंजता रहा। नागा संन्यासी और किन्नर संत अन्य साधु-संतों की अपेक्षा उग्र माने जाते हैं, लेकिन शाही स्नान के दौरान दोनों ही बेहद अनुशासित नजर आए। महाशिवरात्रि पर अखाड़ों की परंपरा के साथ विधि-विधान से नागा और किन्नर संत अपनी-अपनी छावनियों से शाही स्नान के लिए निकले। हरकी पैड़ी पहुंचने तक जुलूस में नागा और किन्नर ही दर्शकों के लिए कौतुक बने रहे। अधिकतर नागा और किन्नर हाथों में त्रिशूल, डमरू, तलवार और गदाएं लिए थे। किसी के सिर पर रुद्राक्ष की बनी टोपी तो किसी का पूरा शरीर रुद्राक्ष की अनगिनत मालाओं से लदा था। हरकी पैड़ी पहुंचते ही नागा और किन्नर संत उल्लास से भर गए।