कहते हैं कि कलाकार का कोई मजहब नहीं होता, हुनर ही उसकी पहचान होती है। अखलाक भी एक ऐसे ही कलाकार हैं, जो महाकुंभ की तैयारियों के लिए हरिद्वार को सजाने-संवारने में जुटे हैं। अखलाक मुस्लिम हैं, लेकिन उनके दिमाग में हिंदू देवी-देवताओं और रामायण के सभी पात्रों की अमिट छाप है। भोलेनाथ हों या श्रीराम, पलक झपकते ही अखलाक उनकी आकृतियों को दीवार पर उकेरकर जान डाल देते हैं।